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Q: मृच्छकटिके वसन्तसेनाया: दर्शनं सर्व प्रथमं कस्मिन्नङ्के भवति?
  • A. प्रथमे
  • B. द्वितीये
  • C. तृतीये
  • D. चतुर्थे
Correct Answer: Option A - मृच्छकटिके वसन्तसेनाया: दर्शनं सर्व प्रथमं प्रथमे अङ्के भवति। अर्थात् मृच्छकटिक में वसन्तसेना का सर्वप्रथम दर्शन प्रथम अंक में होता है। शूद्रककृत मृच्छकटिकम् के प्रथम अङ्क का नाम ‘अलङ्कार-न्यास’ है। मृच्छकटिकम् की कथावस्तु कवि प्रतिभा से प्रसूत है। उज्जयिनी का निवासी सार्थवाह विप्रवर चारुदत्त इस प्रकरण का नायक है और वसन्तसेना गणिका नायिका। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है। शेष विकल्प गलत हैं। यह प्रकरणग्रन्थ है इसमें 10 अङ्क हैं। जिनके नाम क्रमश: निम्नलिखित हैं– (1) अलङ्कार-न्यास (2) द्यूतकर-संवाहक (3) सन्धिच्छेद (4) मदनिका-शर्विलक (5) दुर्दिन (6) प्रवहण-विपर्यय (7) आर्यकापहरण (8) वसन्तसेना-मोटन (9) व्यवहार (10) संहार
A. मृच्छकटिके वसन्तसेनाया: दर्शनं सर्व प्रथमं प्रथमे अङ्के भवति। अर्थात् मृच्छकटिक में वसन्तसेना का सर्वप्रथम दर्शन प्रथम अंक में होता है। शूद्रककृत मृच्छकटिकम् के प्रथम अङ्क का नाम ‘अलङ्कार-न्यास’ है। मृच्छकटिकम् की कथावस्तु कवि प्रतिभा से प्रसूत है। उज्जयिनी का निवासी सार्थवाह विप्रवर चारुदत्त इस प्रकरण का नायक है और वसन्तसेना गणिका नायिका। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है। शेष विकल्प गलत हैं। यह प्रकरणग्रन्थ है इसमें 10 अङ्क हैं। जिनके नाम क्रमश: निम्नलिखित हैं– (1) अलङ्कार-न्यास (2) द्यूतकर-संवाहक (3) सन्धिच्छेद (4) मदनिका-शर्विलक (5) दुर्दिन (6) प्रवहण-विपर्यय (7) आर्यकापहरण (8) वसन्तसेना-मोटन (9) व्यवहार (10) संहार

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मृच्छकटिके वसन्तसेनाया: दर्शनं सर्व प्रथमं प्रथमे अङ्के भवति। अर्थात् मृच्छकटिक में वसन्तसेना का सर्वप्रथम दर्शन प्रथम अंक में होता है। शूद्रककृत मृच्छकटिकम् के प्रथम अङ्क का नाम ‘अलङ्कार-न्यास’ है। मृच्छकटिकम् की कथावस्तु कवि प्रतिभा से प्रसूत है। उज्जयिनी का निवासी सार्थवाह विप्रवर चारुदत्त इस प्रकरण का नायक है और वसन्तसेना गणिका नायिका। अत: प्रश्नानुसार विकल्प (a) सही है। शेष विकल्प गलत हैं। यह प्रकरणग्रन्थ है इसमें 10 अङ्क हैं। जिनके नाम क्रमश: निम्नलिखित हैं– (1) अलङ्कार-न्यास (2) द्यूतकर-संवाहक (3) सन्धिच्छेद (4) मदनिका-शर्विलक (5) दुर्दिन (6) प्रवहण-विपर्यय (7) आर्यकापहरण (8) वसन्तसेना-मोटन (9) व्यवहार (10) संहार