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Q: ‘‘मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान, जीवन का यह शाश्वत प्रमाण करता मुझको अमरत्व दान।’’- उपर्युक्त पद में अस्तित्व ज्ञान भूल चुके को अमरत्व देने की बात की गयी है। ऐसा सम्भव होने का आधार है–
  • A. भूलने वाला सरलता से नया ज्ञान ग्रहण कर लेता है।
  • B. भूलने वाला अपने क्षणभंगुर अस्तित्व को भुला कर शाश्वत के प्रति चेतन होने की स्थिति में आ चुका है।
  • C. अस्तित्व ज्ञान भुला कर अस्तित्वहीनता की दशा में पहुँचा हुआ व्यक्ति शाश्वत को ग्रहण कर सकता है।
  • D. अस्तित्व ज्ञान भूलने की बात अलग है और अमरत्व दान ग्रहण करने की बात अलग है।
Correct Answer: Option C - उपर्युक्त पद में अस्तित्व ज्ञान भूल चुके को अमरत्व देने की बात की गयी है। ऐसा सम्भव होने का आधार है- अस्तित्व ज्ञान भुलाकर अस्तित्व हीनता की दशा में पहुँचा हुआ व्यक्ति शाश्वत को ग्रहण कर सकता है।
C. उपर्युक्त पद में अस्तित्व ज्ञान भूल चुके को अमरत्व देने की बात की गयी है। ऐसा सम्भव होने का आधार है- अस्तित्व ज्ञान भुलाकर अस्तित्व हीनता की दशा में पहुँचा हुआ व्यक्ति शाश्वत को ग्रहण कर सकता है।

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उपर्युक्त पद में अस्तित्व ज्ञान भूल चुके को अमरत्व देने की बात की गयी है। ऐसा सम्भव होने का आधार है- अस्तित्व ज्ञान भुलाकर अस्तित्व हीनता की दशा में पहुँचा हुआ व्यक्ति शाश्वत को ग्रहण कर सकता है।