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Q: ‘काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते’- अलंकार की यह परिभाषा किस आचार्य की है:
  • A. भामह
  • B. दण्डी
  • C. उद्भट
  • D. रुद्रट
Correct Answer: Option B - ‘काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते’- अलंकार की यह परिभाषा आचार्य दण्डी की है। भामाह ने ‘शब्दार्थौ सहित काव्यम्’ परिभाषा देकर काव्य की परिभाषा दिया। अलंकार सम्प्रदाय के प्रतिष्ठापक आचार्य भामह है। भामह ने ‘काव्यालंकार’ नामक ग्रंथ लिखा। भामह ने 38 अलंकारों का वर्णन किया।
B. ‘काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते’- अलंकार की यह परिभाषा आचार्य दण्डी की है। भामाह ने ‘शब्दार्थौ सहित काव्यम्’ परिभाषा देकर काव्य की परिभाषा दिया। अलंकार सम्प्रदाय के प्रतिष्ठापक आचार्य भामह है। भामह ने ‘काव्यालंकार’ नामक ग्रंथ लिखा। भामह ने 38 अलंकारों का वर्णन किया।

Explanations:

‘काव्यशोभाकरान् धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते’- अलंकार की यह परिभाषा आचार्य दण्डी की है। भामाह ने ‘शब्दार्थौ सहित काव्यम्’ परिभाषा देकर काव्य की परिभाषा दिया। अलंकार सम्प्रदाय के प्रतिष्ठापक आचार्य भामह है। भामह ने ‘काव्यालंकार’ नामक ग्रंथ लिखा। भामह ने 38 अलंकारों का वर्णन किया।