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Q: काव्यप्रकाशानुसारं, परिसंख्याऽलङ्कारस्य कियन्तो भेदा:?
  • A. त्रय:
  • B. षट्
  • C. चत्वार:
  • D. अष्टौ
Correct Answer: Option C - काव्यप्रकाशानुसारं, परिसंख्याऽलङ्कारस्य चत्वार: भेदा: सन्ति। काव्यप्रकाश के अनुसार परिसंख्या अलंकार के 4 भेद हैं। परिसंख्या अर्थालंकार का एक प्रकार है। एक ही वस्तु की अनेक स्थानों में स्थित सम्भव होने पर भी अन्यत्र निषेध कर उसका एक स्थान में वर्णन करना परिसंख्या अलंकार कहलाता है। जैसे- राम के राज्य में वक्रता केवल सुन्दरियों के कटाक्ष में थी।
C. काव्यप्रकाशानुसारं, परिसंख्याऽलङ्कारस्य चत्वार: भेदा: सन्ति। काव्यप्रकाश के अनुसार परिसंख्या अलंकार के 4 भेद हैं। परिसंख्या अर्थालंकार का एक प्रकार है। एक ही वस्तु की अनेक स्थानों में स्थित सम्भव होने पर भी अन्यत्र निषेध कर उसका एक स्थान में वर्णन करना परिसंख्या अलंकार कहलाता है। जैसे- राम के राज्य में वक्रता केवल सुन्दरियों के कटाक्ष में थी।

Explanations:

काव्यप्रकाशानुसारं, परिसंख्याऽलङ्कारस्य चत्वार: भेदा: सन्ति। काव्यप्रकाश के अनुसार परिसंख्या अलंकार के 4 भेद हैं। परिसंख्या अर्थालंकार का एक प्रकार है। एक ही वस्तु की अनेक स्थानों में स्थित सम्भव होने पर भी अन्यत्र निषेध कर उसका एक स्थान में वर्णन करना परिसंख्या अलंकार कहलाता है। जैसे- राम के राज्य में वक्रता केवल सुन्दरियों के कटाक्ष में थी।