search
Q: काव्यप्रकाशाभिमतम् अवरं काव्यं किम्?
  • A. गुणरहितम्
  • B. समासरहितम्
  • C. अलङ्काररहितम्
  • D. व्यङ्ग्यरहितम्
Correct Answer: Option D - काव्यप्रकाशाभिमतम् अवरं काव्यं ‘व्यङ्ग्यरहितम्’। अर्थात् काव्यप्रकाश के अनुसार अवर (निम्न) काव्य व्यंग्य से रहित काव्य को कहते हैं। काव्य के भेद- काव्य के तीन भेद हैं- 1- उत्तम काव्य 2- मध्यम काव्य 3- अधम काव्य 1- उत्तम काव्य - लक्षण- इदमुत्तममतिशयिनि व्यङ्ग्ये वाच्याद् ध्वनिर्बुधै: कथित:।। जहाँ पर वाच्यार्थ (मुख्यार्थ) की अपेक्षा व्यङ्ग्यार्थ अधिक चमत्कारी होता है वह ध्वनि काव्य उत्तम काव्य कहा जाता है। उदाहरण - नि:शेषच्युतचन्दनं स्तनतटं निर्मृष्टरागोऽधरो नेत्रे दूरमञ्जने पुलकिता तन्वी तवेयं तनु:। मिथ्यावादिनि दूति बान्धवजनस्याज्ञातपीडागमे वापीं स्नातुमितो गतासि न पुनस्तस्याधमस्यान्तिकम्।। 2- मध्यम काव्य - लक्षण - अतादृशि गुणीभूतव्यङ्ग्यं व्यङ्ग्ये तु मध्यमम्।। यदि व्यङ्ग्यार्थ की अपेक्षा वाच्यार्थ ही अधिक चमत्कारी हो तो गुणीभूतव्यङ्ग्यकाव्य, मध्यम काव्य कहा जाता है। जैसे- ग्रामतरुणं तरुण्या नवमञ्जुलमञ्जरीसनाथकरम्। पश्यन्त्या भवति मुहुर्नितरां मलिना मुखच्छाया। 3- अधम काव्य - लक्षण- शब्दचित्रं वाच्यचित्रमव्यङ्ग्यं त्ववरं स्मृतम्। व्यङ्ग्य से रहित काव्य अवर (अधम) काव्य कहा जाता है जो कि 2 प्रकार का होता है। • शब्द चित्र, • अर्थचित्र विनिर्गतं मानदमात्ममन्दिराद्- भवत्युपश्रुत्य यद्दच्छयाऽपि यम्। ससंभ्रमेन्द्र द्रुतपातितर्गला निमीलिताक्षीव भियाऽमरावती।।
D. काव्यप्रकाशाभिमतम् अवरं काव्यं ‘व्यङ्ग्यरहितम्’। अर्थात् काव्यप्रकाश के अनुसार अवर (निम्न) काव्य व्यंग्य से रहित काव्य को कहते हैं। काव्य के भेद- काव्य के तीन भेद हैं- 1- उत्तम काव्य 2- मध्यम काव्य 3- अधम काव्य 1- उत्तम काव्य - लक्षण- इदमुत्तममतिशयिनि व्यङ्ग्ये वाच्याद् ध्वनिर्बुधै: कथित:।। जहाँ पर वाच्यार्थ (मुख्यार्थ) की अपेक्षा व्यङ्ग्यार्थ अधिक चमत्कारी होता है वह ध्वनि काव्य उत्तम काव्य कहा जाता है। उदाहरण - नि:शेषच्युतचन्दनं स्तनतटं निर्मृष्टरागोऽधरो नेत्रे दूरमञ्जने पुलकिता तन्वी तवेयं तनु:। मिथ्यावादिनि दूति बान्धवजनस्याज्ञातपीडागमे वापीं स्नातुमितो गतासि न पुनस्तस्याधमस्यान्तिकम्।। 2- मध्यम काव्य - लक्षण - अतादृशि गुणीभूतव्यङ्ग्यं व्यङ्ग्ये तु मध्यमम्।। यदि व्यङ्ग्यार्थ की अपेक्षा वाच्यार्थ ही अधिक चमत्कारी हो तो गुणीभूतव्यङ्ग्यकाव्य, मध्यम काव्य कहा जाता है। जैसे- ग्रामतरुणं तरुण्या नवमञ्जुलमञ्जरीसनाथकरम्। पश्यन्त्या भवति मुहुर्नितरां मलिना मुखच्छाया। 3- अधम काव्य - लक्षण- शब्दचित्रं वाच्यचित्रमव्यङ्ग्यं त्ववरं स्मृतम्। व्यङ्ग्य से रहित काव्य अवर (अधम) काव्य कहा जाता है जो कि 2 प्रकार का होता है। • शब्द चित्र, • अर्थचित्र विनिर्गतं मानदमात्ममन्दिराद्- भवत्युपश्रुत्य यद्दच्छयाऽपि यम्। ससंभ्रमेन्द्र द्रुतपातितर्गला निमीलिताक्षीव भियाऽमरावती।।

Explanations:

काव्यप्रकाशाभिमतम् अवरं काव्यं ‘व्यङ्ग्यरहितम्’। अर्थात् काव्यप्रकाश के अनुसार अवर (निम्न) काव्य व्यंग्य से रहित काव्य को कहते हैं। काव्य के भेद- काव्य के तीन भेद हैं- 1- उत्तम काव्य 2- मध्यम काव्य 3- अधम काव्य 1- उत्तम काव्य - लक्षण- इदमुत्तममतिशयिनि व्यङ्ग्ये वाच्याद् ध्वनिर्बुधै: कथित:।। जहाँ पर वाच्यार्थ (मुख्यार्थ) की अपेक्षा व्यङ्ग्यार्थ अधिक चमत्कारी होता है वह ध्वनि काव्य उत्तम काव्य कहा जाता है। उदाहरण - नि:शेषच्युतचन्दनं स्तनतटं निर्मृष्टरागोऽधरो नेत्रे दूरमञ्जने पुलकिता तन्वी तवेयं तनु:। मिथ्यावादिनि दूति बान्धवजनस्याज्ञातपीडागमे वापीं स्नातुमितो गतासि न पुनस्तस्याधमस्यान्तिकम्।। 2- मध्यम काव्य - लक्षण - अतादृशि गुणीभूतव्यङ्ग्यं व्यङ्ग्ये तु मध्यमम्।। यदि व्यङ्ग्यार्थ की अपेक्षा वाच्यार्थ ही अधिक चमत्कारी हो तो गुणीभूतव्यङ्ग्यकाव्य, मध्यम काव्य कहा जाता है। जैसे- ग्रामतरुणं तरुण्या नवमञ्जुलमञ्जरीसनाथकरम्। पश्यन्त्या भवति मुहुर्नितरां मलिना मुखच्छाया। 3- अधम काव्य - लक्षण- शब्दचित्रं वाच्यचित्रमव्यङ्ग्यं त्ववरं स्मृतम्। व्यङ्ग्य से रहित काव्य अवर (अधम) काव्य कहा जाता है जो कि 2 प्रकार का होता है। • शब्द चित्र, • अर्थचित्र विनिर्गतं मानदमात्ममन्दिराद्- भवत्युपश्रुत्य यद्दच्छयाऽपि यम्। ससंभ्रमेन्द्र द्रुतपातितर्गला निमीलिताक्षीव भियाऽमरावती।।