Explanations:
काव्य के विशिष्ट तत्व के रूप में ध्वनि शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग आचार्य आनन्दवर्धन ने किया। अपने `ध्वन्यालोक' नामक ग्रंथ में आचार्य आनन्दवर्धन ने ध्वनि सिद्धान्त का अत्यंत सूक्ष्म और सांगोपांग वर्णन करते हुए इसे वाक्य के सार्वभौम सिद्धान्त के रूप में स्थापित किया। ध्वनि के विरुद्ध संभाव्य आपत्तियों का निराकरण करते हुए आनंदवर्धन ने काव्य के गुण, रीति तथा अलंकार सिद्धान्तों का ध्वनि में समाहार किया।