Correct Answer:
Option B - श्लोकार्थ– हे हंस! यदि नीर (जल) से क्षीर (दूध) को विलग करने में तू ही आलस्य करेगा तो फिर इस संसार में और दूसरा कौन अपने कुलव्रत (कुल की परिपाटी) का पालन करेगा? अर्थात् यदि सज्जन ही उत्तम कार्य करने में अथवा अपनी मर्यादा के पालन में आलस्य करेंगे तो फिर साधारण मनुष्य अपने धर्म विरुद्ध कार्य करने में क्यों हिचकेंगे?
‘नीरक्षीर विवेक’ में प्रयुक्त नीर शब्द का अर्थ जल है जबकि ‘क्षीर’ शब्द ‘दूध’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। अत: विकल्प (b) सही है।
B. श्लोकार्थ– हे हंस! यदि नीर (जल) से क्षीर (दूध) को विलग करने में तू ही आलस्य करेगा तो फिर इस संसार में और दूसरा कौन अपने कुलव्रत (कुल की परिपाटी) का पालन करेगा? अर्थात् यदि सज्जन ही उत्तम कार्य करने में अथवा अपनी मर्यादा के पालन में आलस्य करेंगे तो फिर साधारण मनुष्य अपने धर्म विरुद्ध कार्य करने में क्यों हिचकेंगे?
‘नीरक्षीर विवेक’ में प्रयुक्त नीर शब्द का अर्थ जल है जबकि ‘क्षीर’ शब्द ‘दूध’ के लिए प्रयुक्त हुआ है। अत: विकल्प (b) सही है।