Correct Answer:
Option A - दिये गये विकल्प के अनुसार केशवदास को रीतिबद्ध कवि वर्ग में रखना समीचीन है। डॉ. नगेन्द्र ने रचनाकार-व्यक्तित्व की समृद्धि की दृष्टि से केशवदास (1555 ई. - 1617 ई.) को रीतिकाल का प्रवर्तक माना है। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने ‘हिन्दी साहित्य का अतीत’ में रीतिकाल को ‘शृंगार काल’ की संज्ञा से अभिहित किया है और केशवदास को रीतिबद्ध कवियों की श्रेणी में शीर्ष पर रखा है।
A. दिये गये विकल्प के अनुसार केशवदास को रीतिबद्ध कवि वर्ग में रखना समीचीन है। डॉ. नगेन्द्र ने रचनाकार-व्यक्तित्व की समृद्धि की दृष्टि से केशवदास (1555 ई. - 1617 ई.) को रीतिकाल का प्रवर्तक माना है। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने ‘हिन्दी साहित्य का अतीत’ में रीतिकाल को ‘शृंगार काल’ की संज्ञा से अभिहित किया है और केशवदास को रीतिबद्ध कवियों की श्रेणी में शीर्ष पर रखा है।