Correct Answer:
Option D - –‘‘कश्चित् कान्ता विरह गुरुणा’’ इत्यादि श्लोक में वस्तुनिर्देशात्मक मङ्गलाचरण का प्रयोग हुआ है।
कश्चित् कान्ता विरह गुरुणा स्वाधिकारात्प्रमत्त:,
शापेनास्तङ्गमितमहिमा वर्षभोग्येण भर्तु:।
यक्षश्चक्रे जनकतनया स्नानपुण्योदकेषु,
स्निग्धच्छायातरुषु वसतिं रामगिर्याश्रमेषु।।
यह श्लोक मेघदूतम् का है इसमें वस्तुनिर्देशात्मक मङ्गलाचरण का प्रयोग है।
ग्रन्थ की निर्विघ्न समाप्ति के लिए ग्रन्थ के आरम्भ में मध्य में और अन्त में मङ्गलाचरण किया जाता है। मङ्गलाचरण तीन प्रकार का होता है।
(1) आशीर्वादात्मक - अभिज्ञानशाकुन्तलम्
(2) नमस्क्रियात्मक - नीतिशतकम्, उत्तररामचरितम्
(3) वस्तुनिर्देशात्मक - किरातार्जुनीयम्, शिशुपालवधम्
D. –‘‘कश्चित् कान्ता विरह गुरुणा’’ इत्यादि श्लोक में वस्तुनिर्देशात्मक मङ्गलाचरण का प्रयोग हुआ है।
कश्चित् कान्ता विरह गुरुणा स्वाधिकारात्प्रमत्त:,
शापेनास्तङ्गमितमहिमा वर्षभोग्येण भर्तु:।
यक्षश्चक्रे जनकतनया स्नानपुण्योदकेषु,
स्निग्धच्छायातरुषु वसतिं रामगिर्याश्रमेषु।।
यह श्लोक मेघदूतम् का है इसमें वस्तुनिर्देशात्मक मङ्गलाचरण का प्रयोग है।
ग्रन्थ की निर्विघ्न समाप्ति के लिए ग्रन्थ के आरम्भ में मध्य में और अन्त में मङ्गलाचरण किया जाता है। मङ्गलाचरण तीन प्रकार का होता है।
(1) आशीर्वादात्मक - अभिज्ञानशाकुन्तलम्
(2) नमस्क्रियात्मक - नीतिशतकम्, उत्तररामचरितम्
(3) वस्तुनिर्देशात्मक - किरातार्जुनीयम्, शिशुपालवधम्