Correct Answer:
Option A - सम्प्रभुता के एकत्व सिद्धान्त के विरोध के रूप में बहुलवाद को माना जाता है। बहुलवादियों ने भिन्न-भिन्न आधारों पर प्रभुसत्ता के एकत्ववादी सिद्धान्त पर प्रहार किया है। लियो दुग्वी के अनुसार ‘‘कानून सम्प्रभु की आज्ञा नहीं वरन सामाजिक समरसता की शर्त है क्योंंकि कानून को अस्तित्व में लाने का श्रेय राज्यों को नहीं है। वह राज्य की उत्पत्ति के पूर्व भी विद्यमान था।’’ लास्की, जी.डी.एच. कोल, बार्कर, लिंडसे और मैकाइवर ने भी संप्रभुता के बहुलवादी सिंद्धांत का समर्थन किया है।
A. सम्प्रभुता के एकत्व सिद्धान्त के विरोध के रूप में बहुलवाद को माना जाता है। बहुलवादियों ने भिन्न-भिन्न आधारों पर प्रभुसत्ता के एकत्ववादी सिद्धान्त पर प्रहार किया है। लियो दुग्वी के अनुसार ‘‘कानून सम्प्रभु की आज्ञा नहीं वरन सामाजिक समरसता की शर्त है क्योंंकि कानून को अस्तित्व में लाने का श्रेय राज्यों को नहीं है। वह राज्य की उत्पत्ति के पूर्व भी विद्यमान था।’’ लास्की, जी.डी.एच. कोल, बार्कर, लिंडसे और मैकाइवर ने भी संप्रभुता के बहुलवादी सिंद्धांत का समर्थन किया है।