Explanations:
शृंगार रस को कार्य व्यापार की व्यापकता के कारण ‘रसराज’ कहा जाता है। महाराज भोज ने शृंगार रस को ‘रसराज’ की उपाधि दी है। भरत मुनि आठ प्रकार के रसों का उल्लेख किया है जबकि अभिनव गुप्त ने मूलत: रसों की संख्या नौ माना है- (i) शृंगार रस (vi) भयानक रस (i) हास्य रस (vii) अदभूत रस (iii) करुण रस (viii) वीभत्स रस (iv) वीर रस (ix) शान्तरस (v) रौद्र रस