Explanations:
‘अवतारवाद’ की चर्चा का उल्लेख सबसे पहले ‘भगवद्गीता’ में मिलता है। नारायण, नृसिंह एवं वामन दैवीय अवतार माने जाते है और शेष सात मानवीय अवतार माने जाते हैं। वासुदेव कृष्ण सहित चार वृष्णि वीरों की पूजा की चतुर्व्यूह के रूप में कल्पना की गयी है। चतुर्व्यूह पूजा का सर्वप्रथम प्रयोग विष्णु संहिता में मिलता है।