Correct Answer:
Option C - कुरूणामधिप: का तात्पर्य कुरु देश के राजा अर्थात् दुर्योधन से है। कुरुणामधिप: शब्द भारवि की प्रसिद्ध कृति किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग के प्रथम श्लोक में वर्णित है। ‘कुरुणामधिप:’ पद दुर्योधन का विशेषण है। ‘किरातार्जुनीयम्’ महाकाव्य में दुर्योधन को नीतिनिपुण, अच्छा शासक आदि गुणों से कवि ने निर्दिष्ट किया है। भले ही क्यों न वह सामाजिक दृष्टिकोण में दुराचारी प्रवृत्ति रूप में देखा गया हो।
C. कुरूणामधिप: का तात्पर्य कुरु देश के राजा अर्थात् दुर्योधन से है। कुरुणामधिप: शब्द भारवि की प्रसिद्ध कृति किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग के प्रथम श्लोक में वर्णित है। ‘कुरुणामधिप:’ पद दुर्योधन का विशेषण है। ‘किरातार्जुनीयम्’ महाकाव्य में दुर्योधन को नीतिनिपुण, अच्छा शासक आदि गुणों से कवि ने निर्दिष्ट किया है। भले ही क्यों न वह सामाजिक दृष्टिकोण में दुराचारी प्रवृत्ति रूप में देखा गया हो।