Correct Answer:
Option C - कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रतापी शासक था। इसने 78ई. में अपना राज्यारोहण किया तथा इस उपलक्ष्य में एक संवत चलाया, जो शक-संवत कहलाता है तथा जिसे भारत सरकार द्वारा ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ 22 मार्च, 1957 से ‘भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। 78 ई. को शक युग का आरम्भ भी माना जाता है। इसके शासन काल में चौथी बौद्ध संगीति, कुण्डलवन (कश्मीर) में बौद्ध विद्वान वसुमित्र की अध्यक्षता में हुई। जिसमें बौद्ध धर्म का विभाजन हीनयान तथा महायान में हो गया। कनिष्क बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय का अनुयायी था। कुषाण वंश का अंतिम शासक वासुदेव था।
C. कनिष्क कुषाण वंश का सबसे प्रतापी शासक था। इसने 78ई. में अपना राज्यारोहण किया तथा इस उपलक्ष्य में एक संवत चलाया, जो शक-संवत कहलाता है तथा जिसे भारत सरकार द्वारा ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ 22 मार्च, 1957 से ‘भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। 78 ई. को शक युग का आरम्भ भी माना जाता है। इसके शासन काल में चौथी बौद्ध संगीति, कुण्डलवन (कश्मीर) में बौद्ध विद्वान वसुमित्र की अध्यक्षता में हुई। जिसमें बौद्ध धर्म का विभाजन हीनयान तथा महायान में हो गया। कनिष्क बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय का अनुयायी था। कुषाण वंश का अंतिम शासक वासुदेव था।