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Q: कम्प्यूटर तकनीक की पाँचवीं पीढ़ी किस पर आधारित है?
  • A. ट्रांजिस्टर
  • B. वैरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (वीएलएसआई) माइक्रोप्रोसेसर
  • C. अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (यूएलएसआई) माइक्रोप्रोसेसर
  • D. एकीकृत सर्किट
Correct Answer: Option C - कम्प्यूटर तकनीक की पाँचवीं पीढ़ी (1989 से अब तक) अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (ULSI) पर आधारित होगी। पाँचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर ULSI(Ultra Large Scale Integration) तकनीक पर आधारित है। इस जनरेशन के कम्प्यूटर्स में कृत्रिम बुद्धि क्षमता विकसित की जा रही है, ये उसी के अनुसार कार्य करेंगे इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में स्वयं सोचने की क्षमता पैदा की जा रही है और कुछ हद तक सफलता भी मिल चुकी है। उदाहरण के लिए विंडोज कोर्टाना (Windows Cortana), गूगल असिस्टेंट (Google Assistant), एप्पल सीरी (Apple Siri) इत्यादि। इसमें हाई लेविल प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। GUI (Graphical User Interface) की सहायता से इसे अधिक सरल बनाया जा रहा है।
C. कम्प्यूटर तकनीक की पाँचवीं पीढ़ी (1989 से अब तक) अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (ULSI) पर आधारित होगी। पाँचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर ULSI(Ultra Large Scale Integration) तकनीक पर आधारित है। इस जनरेशन के कम्प्यूटर्स में कृत्रिम बुद्धि क्षमता विकसित की जा रही है, ये उसी के अनुसार कार्य करेंगे इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में स्वयं सोचने की क्षमता पैदा की जा रही है और कुछ हद तक सफलता भी मिल चुकी है। उदाहरण के लिए विंडोज कोर्टाना (Windows Cortana), गूगल असिस्टेंट (Google Assistant), एप्पल सीरी (Apple Siri) इत्यादि। इसमें हाई लेविल प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। GUI (Graphical User Interface) की सहायता से इसे अधिक सरल बनाया जा रहा है।

Explanations:

कम्प्यूटर तकनीक की पाँचवीं पीढ़ी (1989 से अब तक) अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (ULSI) पर आधारित होगी। पाँचवी पीढ़ी के कम्प्यूटर ULSI(Ultra Large Scale Integration) तकनीक पर आधारित है। इस जनरेशन के कम्प्यूटर्स में कृत्रिम बुद्धि क्षमता विकसित की जा रही है, ये उसी के अनुसार कार्य करेंगे इस पीढ़ी के कम्प्यूटर में स्वयं सोचने की क्षमता पैदा की जा रही है और कुछ हद तक सफलता भी मिल चुकी है। उदाहरण के लिए विंडोज कोर्टाना (Windows Cortana), गूगल असिस्टेंट (Google Assistant), एप्पल सीरी (Apple Siri) इत्यादि। इसमें हाई लेविल प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। GUI (Graphical User Interface) की सहायता से इसे अधिक सरल बनाया जा रहा है।