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Q: ‘कामागाटामारू’ क्या था?
  • A. एक जहाज
  • B. एक संगठन
  • C. एक आन्दोलन
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - कामागाटामारू एक जहाज था। कामागाटामारू की घटना 1914 में उस समय घटित हुआ था जब कनाड़ा की सरकार ने उन भारतीयों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था, जो भारत से सीधे कनाड़ा न आया हो। बाबा गुरुदत्त सिंह के नेतृत्व में पंजाब के 376 यात्री जापानी समुद्री जहाज ‘कामागाटामारू’ में बैठकर हांगकांग से रवाना हुए थे। जब यह जहाज याकोहामा पहुँचा तब प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हो चुका था। जब यह जहाज वैंकूवर (कनाड़ा) पहुँचा तो कनाड़ा की सरकार ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी। विभिन्न प्रतिबंधों के चलते जहाज को वापस भारत की ओर लौटना पड़ा। इसके बाद जब जहाज ‘बजबज’ बंदरगाह पर पहुँचा तो यात्रियों और पुलिस में झड़पें हुई। इसमें कुछ यात्री मारे गए और शेष को जेल में डाल दिया गया।
A. कामागाटामारू एक जहाज था। कामागाटामारू की घटना 1914 में उस समय घटित हुआ था जब कनाड़ा की सरकार ने उन भारतीयों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था, जो भारत से सीधे कनाड़ा न आया हो। बाबा गुरुदत्त सिंह के नेतृत्व में पंजाब के 376 यात्री जापानी समुद्री जहाज ‘कामागाटामारू’ में बैठकर हांगकांग से रवाना हुए थे। जब यह जहाज याकोहामा पहुँचा तब प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हो चुका था। जब यह जहाज वैंकूवर (कनाड़ा) पहुँचा तो कनाड़ा की सरकार ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी। विभिन्न प्रतिबंधों के चलते जहाज को वापस भारत की ओर लौटना पड़ा। इसके बाद जब जहाज ‘बजबज’ बंदरगाह पर पहुँचा तो यात्रियों और पुलिस में झड़पें हुई। इसमें कुछ यात्री मारे गए और शेष को जेल में डाल दिया गया।

Explanations:

कामागाटामारू एक जहाज था। कामागाटामारू की घटना 1914 में उस समय घटित हुआ था जब कनाड़ा की सरकार ने उन भारतीयों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था, जो भारत से सीधे कनाड़ा न आया हो। बाबा गुरुदत्त सिंह के नेतृत्व में पंजाब के 376 यात्री जापानी समुद्री जहाज ‘कामागाटामारू’ में बैठकर हांगकांग से रवाना हुए थे। जब यह जहाज याकोहामा पहुँचा तब प्रथम विश्व युद्ध प्रारम्भ हो चुका था। जब यह जहाज वैंकूवर (कनाड़ा) पहुँचा तो कनाड़ा की सरकार ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी। विभिन्न प्रतिबंधों के चलते जहाज को वापस भारत की ओर लौटना पड़ा। इसके बाद जब जहाज ‘बजबज’ बंदरगाह पर पहुँचा तो यात्रियों और पुलिस में झड़पें हुई। इसमें कुछ यात्री मारे गए और शेष को जेल में डाल दिया गया।