Correct Answer:
Option B - कोलीय विद्रोह 1824 के अन्त में पश्चिमी घाट एवं कच्छ के सीमावर्ती भाग में कोलिय जनजाति द्वारा किया गया विद्रोह था जो पूर्व में स्थानीय दुर्गों के सैनिक के रूप में कार्य करते थे अंग्रेजों के शासन स्थापित होने के पश्चात दुर्गो का महत्त्व समाप्त हो गया जिससे ये बेगार हो गये इससे क्षुब्ध होकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिये। इस विद्रोह के नेता भाऊ सरे, चिमनजी यादव, नाना दरबारे आदि थे। यह विद्रोह कई चरणों में तथा आस-पास के क्षेत्रों में 1850 ई. तक चलता रहा।
B. कोलीय विद्रोह 1824 के अन्त में पश्चिमी घाट एवं कच्छ के सीमावर्ती भाग में कोलिय जनजाति द्वारा किया गया विद्रोह था जो पूर्व में स्थानीय दुर्गों के सैनिक के रूप में कार्य करते थे अंग्रेजों के शासन स्थापित होने के पश्चात दुर्गो का महत्त्व समाप्त हो गया जिससे ये बेगार हो गये इससे क्षुब्ध होकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिये। इस विद्रोह के नेता भाऊ सरे, चिमनजी यादव, नाना दरबारे आदि थे। यह विद्रोह कई चरणों में तथा आस-पास के क्षेत्रों में 1850 ई. तक चलता रहा।