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Q: ‘कालकाचार्य कथा’ और ‘कल्पसूत्र’ में चित्रित किया गया है–
  • A. बुद्ध लघुचित्र
  • B. जैन लघुचित्र
  • C. अजंता चित्रकला
  • D. बाघ गुफा चित्रकला
Correct Answer: Option B - • राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचाीन चित्रों से भी एक शताब्दी पहले की सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित कल्पसूत्र तथा कालकाचार्यकथा के आधार पर निर्मित पाश्र्वनाथ, नेमीनाथ और ऋषभनाथ तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओें के दृष्टांत चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण है। • जैन चित्रकला की ऐतिहासिक उपलब्धि 7 वीं शताब्दी से है जिसके प्रमाण सम्राट हर्ष के समकालीन पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन (7 वीं शताब्दी) के समय में बनी सित्तन्नवासल गुफाँ की पाँच जैन मूर्तियॉै है। • सन् 1924 ई. में बर्लिन म्यूजियम (जर्मनी) में कल्पसूत्र की सचित्र प्रति की खोज आनंद कुमार स्वामी ने की।
B. • राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचाीन चित्रों से भी एक शताब्दी पहले की सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित कल्पसूत्र तथा कालकाचार्यकथा के आधार पर निर्मित पाश्र्वनाथ, नेमीनाथ और ऋषभनाथ तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओें के दृष्टांत चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण है। • जैन चित्रकला की ऐतिहासिक उपलब्धि 7 वीं शताब्दी से है जिसके प्रमाण सम्राट हर्ष के समकालीन पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन (7 वीं शताब्दी) के समय में बनी सित्तन्नवासल गुफाँ की पाँच जैन मूर्तियॉै है। • सन् 1924 ई. में बर्लिन म्यूजियम (जर्मनी) में कल्पसूत्र की सचित्र प्रति की खोज आनंद कुमार स्वामी ने की।

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• राजपूत परम्परा की भाँति जैन कला भी ऐसी प्राचीन परम्परा पर आधारित है, जो राजपूत कलम में प्राप्त सर्वाधिक प्राचाीन चित्रों से भी एक शताब्दी पहले की सिद्ध होती है। ताड़पत्र पर अंकित कल्पसूत्र तथा कालकाचार्यकथा के आधार पर निर्मित पाश्र्वनाथ, नेमीनाथ और ऋषभनाथ तथा अन्य बीस तीर्थंकर महात्माओें के दृष्टांत चित्र जैनकला के सर्वाधिक प्राचीन उदाहरण है। • जैन चित्रकला की ऐतिहासिक उपलब्धि 7 वीं शताब्दी से है जिसके प्रमाण सम्राट हर्ष के समकालीन पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन (7 वीं शताब्दी) के समय में बनी सित्तन्नवासल गुफाँ की पाँच जैन मूर्तियॉै है। • सन् 1924 ई. में बर्लिन म्यूजियम (जर्मनी) में कल्पसूत्र की सचित्र प्रति की खोज आनंद कुमार स्वामी ने की।