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Q: कलचुरि राजवंश की सात नायिकाओं के नखशिख वर्णन से सम्बन्धित ग्रंथ है
  • A. उक्ति व्यक्ति प्रकरण
  • B. राउर बेलि
  • C. कुबलय माला कथा
  • D. वर्णरत्नाकर
Correct Answer: Option B - कलचुरि राजवंश की सात नायिकाओं के नखशिख वर्णन से सम्बन्धित ग्रंथ ‘राउर बेलि’ है जिसके रचनाकार रोडा कवि हैं। यह एक शिलांकित कृति के साथ-साथ चम्पू काव्य है अर्थात् गद्य पद्य मिश्रित रचना है। वर्तमान में यह कृति मुम्बई के ‘प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय’ में सुरक्षित है। ‘उक्ति - व्यक्ति प्रकरण’ दामोदर शर्मा द्वारा रचित हिन्दी व्याकरण का पहला ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल 12वीं शती का पूर्वार्द्ध माना जाता है। ‘वर्णरत्नाकर’ के रचनाकार ज्योतिरीश्वर ठाकुर हैं। इसकी भाषा मैथिली है। ठाकुर, मिथिला के कर्नाटक वंश के राजा हरिसिंह देव के दरबारी कवि थे। कुवलयमाला कथा के रचनाकार उद्योतन सूरि है।
B. कलचुरि राजवंश की सात नायिकाओं के नखशिख वर्णन से सम्बन्धित ग्रंथ ‘राउर बेलि’ है जिसके रचनाकार रोडा कवि हैं। यह एक शिलांकित कृति के साथ-साथ चम्पू काव्य है अर्थात् गद्य पद्य मिश्रित रचना है। वर्तमान में यह कृति मुम्बई के ‘प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय’ में सुरक्षित है। ‘उक्ति - व्यक्ति प्रकरण’ दामोदर शर्मा द्वारा रचित हिन्दी व्याकरण का पहला ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल 12वीं शती का पूर्वार्द्ध माना जाता है। ‘वर्णरत्नाकर’ के रचनाकार ज्योतिरीश्वर ठाकुर हैं। इसकी भाषा मैथिली है। ठाकुर, मिथिला के कर्नाटक वंश के राजा हरिसिंह देव के दरबारी कवि थे। कुवलयमाला कथा के रचनाकार उद्योतन सूरि है।

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कलचुरि राजवंश की सात नायिकाओं के नखशिख वर्णन से सम्बन्धित ग्रंथ ‘राउर बेलि’ है जिसके रचनाकार रोडा कवि हैं। यह एक शिलांकित कृति के साथ-साथ चम्पू काव्य है अर्थात् गद्य पद्य मिश्रित रचना है। वर्तमान में यह कृति मुम्बई के ‘प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय’ में सुरक्षित है। ‘उक्ति - व्यक्ति प्रकरण’ दामोदर शर्मा द्वारा रचित हिन्दी व्याकरण का पहला ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल 12वीं शती का पूर्वार्द्ध माना जाता है। ‘वर्णरत्नाकर’ के रचनाकार ज्योतिरीश्वर ठाकुर हैं। इसकी भाषा मैथिली है। ठाकुर, मिथिला के कर्नाटक वंश के राजा हरिसिंह देव के दरबारी कवि थे। कुवलयमाला कथा के रचनाकार उद्योतन सूरि है।