Correct Answer:
Option A - कोहलबर्ग के सिद्धान्त के पूर्व-परम्परागत स्तर के अनुसार इस स्तर पर बालक नैतिक विकास तीन सोपानों के अन्तर्गत होता है।
∎ आत्मकेन्द्रित निर्णय– इसमें बालक अपनी इच्छा-अनिच्छा अथवा पसंद-नापसंद से हटकर किसी भी नियम का परवाह नही करते
∎ दण्ड तथा आज्ञा-पालन अभिमुखता– इसमें बालक का नैतिक व्यवहार दण्ड या आज्ञा-पालन से निर्धारित व संचालित होता है।
∎ यांत्रिक सापेक्षिक अभिमुखता– इस स्तर पर बालक मानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को देखना होता है तथा कोई भी व्यक्ति केवल उन व्यक्तियों के प्रति उत्तरदायी होता है जो उसकी सहायता करते हैं।
A. कोहलबर्ग के सिद्धान्त के पूर्व-परम्परागत स्तर के अनुसार इस स्तर पर बालक नैतिक विकास तीन सोपानों के अन्तर्गत होता है।
∎ आत्मकेन्द्रित निर्णय– इसमें बालक अपनी इच्छा-अनिच्छा अथवा पसंद-नापसंद से हटकर किसी भी नियम का परवाह नही करते
∎ दण्ड तथा आज्ञा-पालन अभिमुखता– इसमें बालक का नैतिक व्यवहार दण्ड या आज्ञा-पालन से निर्धारित व संचालित होता है।
∎ यांत्रिक सापेक्षिक अभिमुखता– इस स्तर पर बालक मानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को देखना होता है तथा कोई भी व्यक्ति केवल उन व्यक्तियों के प्रति उत्तरदायी होता है जो उसकी सहायता करते हैं।