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Q: के. सी. एस. पाणिकर इसके चित्रकार थे–
  • A. बैंगलोर समूह
  • B. प्रगतिशील कलाकार समूह
  • C. चोलमण्डल कलाकार समूह
  • D. बरोड़ा समूह
Correct Answer: Option C - • 1966 ई. में चोलमण्डल कलाकार समूह की स्थापना के.सी.एस. पन्निकर ने किया था। • 1944 ई. चेन्नई में प्रोग्रेसिव पेंटर्स एसोसिएशन (पी.पी.ए.) की स्थापना के.सी.एस. पन्निकर ने की। • मद्रास आर्ट मूवमेंट के प्रथम व प्रमुख कलाकार के.सी.एस. पनीकर थे। • पन्निकर के माँ-बेटा श्रृंखला में लोक चेतना स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त हुई है। • पन्निकर के धन्य हैं शांति दूत नामक चित्र में अजंता और सित्तनवासल के समान विशाल संयोजन किया गया है। • मुख्याकृतियों को बड़े आकार में तथा तिरछी भंगिमा में अंकित करना पन्निकर की एक खास पहचान थी।
C. • 1966 ई. में चोलमण्डल कलाकार समूह की स्थापना के.सी.एस. पन्निकर ने किया था। • 1944 ई. चेन्नई में प्रोग्रेसिव पेंटर्स एसोसिएशन (पी.पी.ए.) की स्थापना के.सी.एस. पन्निकर ने की। • मद्रास आर्ट मूवमेंट के प्रथम व प्रमुख कलाकार के.सी.एस. पनीकर थे। • पन्निकर के माँ-बेटा श्रृंखला में लोक चेतना स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त हुई है। • पन्निकर के धन्य हैं शांति दूत नामक चित्र में अजंता और सित्तनवासल के समान विशाल संयोजन किया गया है। • मुख्याकृतियों को बड़े आकार में तथा तिरछी भंगिमा में अंकित करना पन्निकर की एक खास पहचान थी।

Explanations:

• 1966 ई. में चोलमण्डल कलाकार समूह की स्थापना के.सी.एस. पन्निकर ने किया था। • 1944 ई. चेन्नई में प्रोग्रेसिव पेंटर्स एसोसिएशन (पी.पी.ए.) की स्थापना के.सी.एस. पन्निकर ने की। • मद्रास आर्ट मूवमेंट के प्रथम व प्रमुख कलाकार के.सी.एस. पनीकर थे। • पन्निकर के माँ-बेटा श्रृंखला में लोक चेतना स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त हुई है। • पन्निकर के धन्य हैं शांति दूत नामक चित्र में अजंता और सित्तनवासल के समान विशाल संयोजन किया गया है। • मुख्याकृतियों को बड़े आकार में तथा तिरछी भंगिमा में अंकित करना पन्निकर की एक खास पहचान थी।