Correct Answer:
Option A - ‘पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स बनाम भारत संघ’ 1980 के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह माना गया था कि न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न करना, जबरन मजदूरी का एक प्रकार है।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में अनुच्छेद 23 की व्याख्या करते हुए जबरन मजदूरी को दण्डनीय अपराध घोषित किया।
ध्यातव्य है कि अनु. 23 और 24 (न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948) के अधीन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध समुचित कार्यवाही करना राज्य का एक सांविधिक कर्त्तव्य है।
A. ‘पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स बनाम भारत संघ’ 1980 के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह माना गया था कि न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न करना, जबरन मजदूरी का एक प्रकार है।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में अनुच्छेद 23 की व्याख्या करते हुए जबरन मजदूरी को दण्डनीय अपराध घोषित किया।
ध्यातव्य है कि अनु. 23 और 24 (न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948) के अधीन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध समुचित कार्यवाही करना राज्य का एक सांविधिक कर्त्तव्य है।