Correct Answer:
Option D - भारत में न्यायिक प्रणाली का प्राथमिक एवं मुख्य स्रोत भारत का संविधान है। कोई विधि, कानून, नियम, उपनियम, आदेश अथवा निर्देश तभी तक विधिमान्य है जब तक वह संवैधानिक उपबंधों के अनुकूल है। इसके अलावा भारत में न्यायिक निर्वचन, `विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ के अनुसरण में गतिशील है अर्थात विधान मण्डल द्वारा उचित प्रक्रिया के अनुपालन में निर्मित विधि को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भावना या इच्छा को नहीं देखा जाता। संवैधानिक व्याख्या में लिखित तत्वों के आधार पर प्रक्रिया का निर्धारण किया जाता है। ‘मेनका गाँधी बनाम भारत संघ’ के वाद में इसे सुस्पष्ट किया गया।
उपर्युक्त प्रश्न में विकल्प (d) अधिक उपयुक्त उत्तर है।
D. भारत में न्यायिक प्रणाली का प्राथमिक एवं मुख्य स्रोत भारत का संविधान है। कोई विधि, कानून, नियम, उपनियम, आदेश अथवा निर्देश तभी तक विधिमान्य है जब तक वह संवैधानिक उपबंधों के अनुकूल है। इसके अलावा भारत में न्यायिक निर्वचन, `विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ के अनुसरण में गतिशील है अर्थात विधान मण्डल द्वारा उचित प्रक्रिया के अनुपालन में निर्मित विधि को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भावना या इच्छा को नहीं देखा जाता। संवैधानिक व्याख्या में लिखित तत्वों के आधार पर प्रक्रिया का निर्धारण किया जाता है। ‘मेनका गाँधी बनाम भारत संघ’ के वाद में इसे सुस्पष्ट किया गया।
उपर्युक्त प्रश्न में विकल्प (d) अधिक उपयुक्त उत्तर है।