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Q: झिल्ली प्रोटीन और लिपिड एवं उनकी गतिशीलता पर मौजूदा आंकड़ों की व्याख्या के लिए सिंगर और निकोलसन के तरल मो़जेक मॉडल को आधारभूत मॉडल के रूप में कब स्वीकार किया गया था?
  • A. 1942 में
  • B. 1982 में
  • C. 1952 में
  • D. 1972 में
Correct Answer: Option D - सिंगर और निकोलसन द्वारा 1972 में प्रस्तावित तरल मोजेक मॉडल को जैविक झिल्ली की संरचना और गतिशीलता को समझाने के लिए एक आधारभूत मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया। इस मॉडल के अनुसार, झिल्ली मुख्य रूप से फास्फोलिपिड द्विपरत से बनी होती है, जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रोटीन अणु तैरते रहते हैं, जिसमें झिल्ली एक गतिशील संरचना बनाए रखती है।
D. सिंगर और निकोलसन द्वारा 1972 में प्रस्तावित तरल मोजेक मॉडल को जैविक झिल्ली की संरचना और गतिशीलता को समझाने के लिए एक आधारभूत मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया। इस मॉडल के अनुसार, झिल्ली मुख्य रूप से फास्फोलिपिड द्विपरत से बनी होती है, जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रोटीन अणु तैरते रहते हैं, जिसमें झिल्ली एक गतिशील संरचना बनाए रखती है।

Explanations:

सिंगर और निकोलसन द्वारा 1972 में प्रस्तावित तरल मोजेक मॉडल को जैविक झिल्ली की संरचना और गतिशीलता को समझाने के लिए एक आधारभूत मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया। इस मॉडल के अनुसार, झिल्ली मुख्य रूप से फास्फोलिपिड द्विपरत से बनी होती है, जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रोटीन अणु तैरते रहते हैं, जिसमें झिल्ली एक गतिशील संरचना बनाए रखती है।