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Q: ‘ज्येष्ठाधिकार’ का क्या अर्थ है:
  • A. ज्येष्ठ पुत्र अपने पिता के राज्य का उत्तराधिकारी होता है।
  • B. राज्य का विभाजन समस्त पुत्रों में कर दिया जाता है।
  • C. समूह के संसाधनों पर मुखिया का अधिकार होता है।
  • D. समूह के संसाधनों पर समूह के सदस्यों का अधिकार होता है।
Correct Answer: Option A - ‘ज्येष्ठाधिकार’ का अर्थ ज्येष्ठ पुत्र अपने पिता के राज्य का उत्तराधिकारी होता है। यह अधिकार परम्परा प्राप्त होता था। शासक की मृत्यु या उसके हटने पर उसके छोटे भाई के बजाय उसका बड़ा बेटा ज्येष्ठता की वजह से उसके राज अधिकारों को ग्रहण करता था। कई बार शासक के जीवित रहते हुए उसके जीवनकाल में ही उत्तराधिकारी का निर्धारण के कारण राज्य में अशान्ति एवं युद्ध का वातावरण हो जाता था। इस अव्यवस्था को पनपने न देने के लिए प्राय: शासकों ने ज्येष्ठाधिकार का सहारा लिया।
A. ‘ज्येष्ठाधिकार’ का अर्थ ज्येष्ठ पुत्र अपने पिता के राज्य का उत्तराधिकारी होता है। यह अधिकार परम्परा प्राप्त होता था। शासक की मृत्यु या उसके हटने पर उसके छोटे भाई के बजाय उसका बड़ा बेटा ज्येष्ठता की वजह से उसके राज अधिकारों को ग्रहण करता था। कई बार शासक के जीवित रहते हुए उसके जीवनकाल में ही उत्तराधिकारी का निर्धारण के कारण राज्य में अशान्ति एवं युद्ध का वातावरण हो जाता था। इस अव्यवस्था को पनपने न देने के लिए प्राय: शासकों ने ज्येष्ठाधिकार का सहारा लिया।

Explanations:

‘ज्येष्ठाधिकार’ का अर्थ ज्येष्ठ पुत्र अपने पिता के राज्य का उत्तराधिकारी होता है। यह अधिकार परम्परा प्राप्त होता था। शासक की मृत्यु या उसके हटने पर उसके छोटे भाई के बजाय उसका बड़ा बेटा ज्येष्ठता की वजह से उसके राज अधिकारों को ग्रहण करता था। कई बार शासक के जीवित रहते हुए उसके जीवनकाल में ही उत्तराधिकारी का निर्धारण के कारण राज्य में अशान्ति एवं युद्ध का वातावरण हो जाता था। इस अव्यवस्था को पनपने न देने के लिए प्राय: शासकों ने ज्येष्ठाधिकार का सहारा लिया।