Correct Answer:
Option A - क्षोभमण्डल की ऊपरी सीमा में सैकड़ों किमी. की चौड़ी पट्टी में पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाहित होने वाली परिध्रुवीय प्रबल पवन धारा को जेट स्ट्रीम कहा जाता है। इस पवन धारा का परिसंचरण दोनों गोलार्द्धों में 20º अक्षांश से धु्रवों के बीच 7.5 से 14 किमी. की ऊँचाई के मध्य होता है। इनके प्रवाह का मार्ग विसर्पित लहरदार होता है। जेट स्ट्रीम के पवन वेग में मौसमी परिवर्तन होता रहता है। ग्रीष्म काल की तुलना में शीतकाल में इनका वेग दुगुना हो जाता है। इसका अधिकतम वायुवेग 480 किमी. प्रति घण्टा होता है। जेट स्ट्रीम का न्यूनतम वायु वेग 108 किमी. प्रति घण्टा होता है। अत: जेट स्ट्रीम का प्रवाह समतापमण्डल में न होकर क्षोभमण्डल की ऊपरी सीमा में होता है।
A. क्षोभमण्डल की ऊपरी सीमा में सैकड़ों किमी. की चौड़ी पट्टी में पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाहित होने वाली परिध्रुवीय प्रबल पवन धारा को जेट स्ट्रीम कहा जाता है। इस पवन धारा का परिसंचरण दोनों गोलार्द्धों में 20º अक्षांश से धु्रवों के बीच 7.5 से 14 किमी. की ऊँचाई के मध्य होता है। इनके प्रवाह का मार्ग विसर्पित लहरदार होता है। जेट स्ट्रीम के पवन वेग में मौसमी परिवर्तन होता रहता है। ग्रीष्म काल की तुलना में शीतकाल में इनका वेग दुगुना हो जाता है। इसका अधिकतम वायुवेग 480 किमी. प्रति घण्टा होता है। जेट स्ट्रीम का न्यूनतम वायु वेग 108 किमी. प्रति घण्टा होता है। अत: जेट स्ट्रीम का प्रवाह समतापमण्डल में न होकर क्षोभमण्डल की ऊपरी सीमा में होता है।