Correct Answer:
Option A - जिस समास के दोनों पद प्रधान हों अर्थात् पूर्वपद और उत्तर पद बराबर महत्व के हों; उसे द्वंद्व समास कहते हैं, यथा - गाय-बैल, भाई-बहन, बेटा-बेटी इत्यादि है।
बहुव्रीहि समास:- जिस समास का कोई भी पद प्रधान नही होता, जो अपने-अपने पदों से भिन्न तीसरे अर्थ की व्यंजना करती है, बहुव्रीहि समास कहते है, यथा- चन्द्रमौलि- चन्द्र है सिर पर जिसके अर्थात शिव
अव्ययीभाव समास:- जिस समास का पहला पद प्रधान हो और अव्यय हो तथा उत्तर पद गौण हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते है- यथा - यथाविधि, प्रतिदिन, यथाशक्ति इत्यादि है।
द्विगु समास:- जिस समास का पहला पद संख्या वाचक हो, उसे द्विगु समास कहते है, जैसे- चौराहा, सतसई, दुराहा इत्यादि।
A. जिस समास के दोनों पद प्रधान हों अर्थात् पूर्वपद और उत्तर पद बराबर महत्व के हों; उसे द्वंद्व समास कहते हैं, यथा - गाय-बैल, भाई-बहन, बेटा-बेटी इत्यादि है।
बहुव्रीहि समास:- जिस समास का कोई भी पद प्रधान नही होता, जो अपने-अपने पदों से भिन्न तीसरे अर्थ की व्यंजना करती है, बहुव्रीहि समास कहते है, यथा- चन्द्रमौलि- चन्द्र है सिर पर जिसके अर्थात शिव
अव्ययीभाव समास:- जिस समास का पहला पद प्रधान हो और अव्यय हो तथा उत्तर पद गौण हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते है- यथा - यथाविधि, प्रतिदिन, यथाशक्ति इत्यादि है।
द्विगु समास:- जिस समास का पहला पद संख्या वाचक हो, उसे द्विगु समास कहते है, जैसे- चौराहा, सतसई, दुराहा इत्यादि।