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Q: जनपद पिथौरागढ़ से 165 किमी. दूर स्थित स्थान जहाँ, ऊनी वस्तुयें, शाल, कालीन, पंखी, पशमीना दुशाले, जड़ी बूटियाँ इत्यादि मिलती हैं, उसका नाम है :
  • A. ग्वालदम
  • B. जोशीमठ
  • C. मुन्स्यारी
  • D. माना
Correct Answer: Option C - मुनिस्यार अर्थात् मुनि का सेरा अर्थात् तपस्वियों का तपस्थल होने के कारण सम्भवत: इसका नाम मुनिस्यारी पड़ा। मुनिस्यारी जनपद पिथौरागढ़ से 165 किमी. दूरी पर स्थित है। मुनिस्यारी में ऊँनी वस्तुएं-शाल, दन, कालीन, पंखी, पशमीना, दुशाले, जड़ी-बूटियां आदि मिलती हैं। यहाँ से रालम, नामिक और मिलम ग्लेशियर को रास्ता जाता है।
C. मुनिस्यार अर्थात् मुनि का सेरा अर्थात् तपस्वियों का तपस्थल होने के कारण सम्भवत: इसका नाम मुनिस्यारी पड़ा। मुनिस्यारी जनपद पिथौरागढ़ से 165 किमी. दूरी पर स्थित है। मुनिस्यारी में ऊँनी वस्तुएं-शाल, दन, कालीन, पंखी, पशमीना, दुशाले, जड़ी-बूटियां आदि मिलती हैं। यहाँ से रालम, नामिक और मिलम ग्लेशियर को रास्ता जाता है।

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मुनिस्यार अर्थात् मुनि का सेरा अर्थात् तपस्वियों का तपस्थल होने के कारण सम्भवत: इसका नाम मुनिस्यारी पड़ा। मुनिस्यारी जनपद पिथौरागढ़ से 165 किमी. दूरी पर स्थित है। मुनिस्यारी में ऊँनी वस्तुएं-शाल, दन, कालीन, पंखी, पशमीना, दुशाले, जड़ी-बूटियां आदि मिलती हैं। यहाँ से रालम, नामिक और मिलम ग्लेशियर को रास्ता जाता है।