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Q: जैन धर्म में, ‘जैन’ शब्द संस्कृत शब्द ‘जिन’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है............, अर्थात् जिसने सभी मानवीय भावावेशों पर विजय प्राप्त कर ली हो।
  • A. विजेता
  • B. फुर्ती
  • C. अमर
  • D. खरापन
Correct Answer: Option A - जैन धर्म में, ‘जैन’ शब्द संस्कृत ‘जिन’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘‘विजेता’’ अर्थात् जिसने प्रेम, द्वेष, सुख, दुख, राग, तृष्णा तथा सभी मानवीय भावावेशों पर विजय प्राप्त कर लिया है और इस तरह ज्ञान, सत्य और क्षमता को ढकने व कर्मों से अपनी आत्मा को मुक्त कर लिया है। वह एक ‘जिन’ कहलाता है।
A. जैन धर्म में, ‘जैन’ शब्द संस्कृत ‘जिन’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘‘विजेता’’ अर्थात् जिसने प्रेम, द्वेष, सुख, दुख, राग, तृष्णा तथा सभी मानवीय भावावेशों पर विजय प्राप्त कर लिया है और इस तरह ज्ञान, सत्य और क्षमता को ढकने व कर्मों से अपनी आत्मा को मुक्त कर लिया है। वह एक ‘जिन’ कहलाता है।

Explanations:

जैन धर्म में, ‘जैन’ शब्द संस्कृत ‘जिन’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘‘विजेता’’ अर्थात् जिसने प्रेम, द्वेष, सुख, दुख, राग, तृष्णा तथा सभी मानवीय भावावेशों पर विजय प्राप्त कर लिया है और इस तरह ज्ञान, सत्य और क्षमता को ढकने व कर्मों से अपनी आत्मा को मुक्त कर लिया है। वह एक ‘जिन’ कहलाता है।