Correct Answer:
Option B - भारत में क्रांतिकारियों का प्रभाव एवं राष्ट्रीय भावना को समाप्त करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1917 में सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की जिसके सुझाव पर 18 मार्च 1919 को रौलेट एक्ट पारित हुआ। रौलेट अधिनियम के अन्तर्गत सरकार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को जब चाहे बिना मुकदमा चलाए जेल में बन्द कर सकती थी। इस कारण इस कानून को ‘बिना वकील, बिना अपील, तथा बिना दलील’ का कानून कहा गया। रौलेट एक्ट के विरूद्ध सत्याग्रह चलाने के लिए फरवरी, 1919 में गाँधी जी ने ‘सत्याग्रह सभा’ की स्थापना की। 9 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में एक विशाल जुलूस निकाला गया जिसका नेतृत्व डॉ. सत्यपाल और डॉ. किचलू ने किया। 10 अप्रैल को दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके विरोध में जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन 13 अप्रैल, 1919 को हुआ, जिस पर जनरल डायर ने गोली चलवाई और हजारों सत्याग्रही शहीद हो गए।
B. भारत में क्रांतिकारियों का प्रभाव एवं राष्ट्रीय भावना को समाप्त करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1917 में सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की जिसके सुझाव पर 18 मार्च 1919 को रौलेट एक्ट पारित हुआ। रौलेट अधिनियम के अन्तर्गत सरकार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को जब चाहे बिना मुकदमा चलाए जेल में बन्द कर सकती थी। इस कारण इस कानून को ‘बिना वकील, बिना अपील, तथा बिना दलील’ का कानून कहा गया। रौलेट एक्ट के विरूद्ध सत्याग्रह चलाने के लिए फरवरी, 1919 में गाँधी जी ने ‘सत्याग्रह सभा’ की स्थापना की। 9 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में एक विशाल जुलूस निकाला गया जिसका नेतृत्व डॉ. सत्यपाल और डॉ. किचलू ने किया। 10 अप्रैल को दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके विरोध में जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन 13 अप्रैल, 1919 को हुआ, जिस पर जनरल डायर ने गोली चलवाई और हजारों सत्याग्रही शहीद हो गए।