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Q: ‘‘जहाँ वक्रता सर्प के चाल में थी। प्रजा में नहीं थी, न भूपाल में थी।।’’ - उपर्युक्त पंक्तियाँ किस अलंकार का उदाहरण है?
  • A. अर्थान्तरन्यास
  • B. परिसंख्या
  • C. विभावना
  • D. अपह्रुति
Correct Answer: Option B - ‘जहाँ वक्रता सर्प के चाल में थी। प्रजा में नहीं थी, न भूपाल में थी।।’ उपर्युक्त पंक्तियों में परिसंख्य अलंकार का उदाहरण है। परिसंख्य अलंकार:- जब किसी वस्तु को अन्य स्थलों से हटाकर किसी एक ही स्थान पर स्थापित किया जाय अर्थात् किसी वस्तु का दूसरे स्थानों में निषेध कर किसी एक स्थान पर वर्णन किया जाता है वहाँ परिसंख्या अलंकार होता है। यहाँ पर वक्रता को सिर्फ सर्प तक सीमित कर दिया गया है, इसलिये यहाँ परिसंख्या अलंकार है। अन्य उदाहरण:- दण्ड जतिन कर, भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज। जी तौ मनसिज सुनिय अस, रामचंद्र के राज।।
B. ‘जहाँ वक्रता सर्प के चाल में थी। प्रजा में नहीं थी, न भूपाल में थी।।’ उपर्युक्त पंक्तियों में परिसंख्य अलंकार का उदाहरण है। परिसंख्य अलंकार:- जब किसी वस्तु को अन्य स्थलों से हटाकर किसी एक ही स्थान पर स्थापित किया जाय अर्थात् किसी वस्तु का दूसरे स्थानों में निषेध कर किसी एक स्थान पर वर्णन किया जाता है वहाँ परिसंख्या अलंकार होता है। यहाँ पर वक्रता को सिर्फ सर्प तक सीमित कर दिया गया है, इसलिये यहाँ परिसंख्या अलंकार है। अन्य उदाहरण:- दण्ड जतिन कर, भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज। जी तौ मनसिज सुनिय अस, रामचंद्र के राज।।

Explanations:

‘जहाँ वक्रता सर्प के चाल में थी। प्रजा में नहीं थी, न भूपाल में थी।।’ उपर्युक्त पंक्तियों में परिसंख्य अलंकार का उदाहरण है। परिसंख्य अलंकार:- जब किसी वस्तु को अन्य स्थलों से हटाकर किसी एक ही स्थान पर स्थापित किया जाय अर्थात् किसी वस्तु का दूसरे स्थानों में निषेध कर किसी एक स्थान पर वर्णन किया जाता है वहाँ परिसंख्या अलंकार होता है। यहाँ पर वक्रता को सिर्फ सर्प तक सीमित कर दिया गया है, इसलिये यहाँ परिसंख्या अलंकार है। अन्य उदाहरण:- दण्ड जतिन कर, भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज। जी तौ मनसिज सुनिय अस, रामचंद्र के राज।।