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Q: जी. आर. संतोष के चित्रों के बारे में गलत कथन का चयन कीजिए–
  • A. वे तांत्रिक दर्शन से प्रभावित थे
  • B. अमूर्त या प्रतिनिधित्व दोनों नहीं थे
  • C. विरोधों में एकता थी
  • D. सुपरमैटि़ज्म से प्रभावित थे
Correct Answer: Option B - •‘जी. आर. संतोष के चित्र अमूर्त या प्रतिनिधित्व दोनों नहीं थे’ यह कथन गलत हैं। • भारत में तांत्रिक कला के जनक जी. आर. संतोष थे। • 1958 ई. में दिल्ली में संतोष ने मुर्गों की प्रदर्शनी हुई। • संतोष तैल रंगों में शहद की मक्खी के छत्ते से निकाला हुआ मोम पिघलाकर लगाते थे, जिससे चित्रों में चमक आ जाती थी। • जी. आर. संतोष की नव-तांत्रिक चित्रकला में महत्वपूर्ण हैं- बिंदु, रेखा, त्रिकोण आदि।
B. •‘जी. आर. संतोष के चित्र अमूर्त या प्रतिनिधित्व दोनों नहीं थे’ यह कथन गलत हैं। • भारत में तांत्रिक कला के जनक जी. आर. संतोष थे। • 1958 ई. में दिल्ली में संतोष ने मुर्गों की प्रदर्शनी हुई। • संतोष तैल रंगों में शहद की मक्खी के छत्ते से निकाला हुआ मोम पिघलाकर लगाते थे, जिससे चित्रों में चमक आ जाती थी। • जी. आर. संतोष की नव-तांत्रिक चित्रकला में महत्वपूर्ण हैं- बिंदु, रेखा, त्रिकोण आदि।

Explanations:

•‘जी. आर. संतोष के चित्र अमूर्त या प्रतिनिधित्व दोनों नहीं थे’ यह कथन गलत हैं। • भारत में तांत्रिक कला के जनक जी. आर. संतोष थे। • 1958 ई. में दिल्ली में संतोष ने मुर्गों की प्रदर्शनी हुई। • संतोष तैल रंगों में शहद की मक्खी के छत्ते से निकाला हुआ मोम पिघलाकर लगाते थे, जिससे चित्रों में चमक आ जाती थी। • जी. आर. संतोष की नव-तांत्रिक चित्रकला में महत्वपूर्ण हैं- बिंदु, रेखा, त्रिकोण आदि।