Correct Answer:
Option A - इटली में पुनर्जागरण ने लैटिन व ग्रीक (यूनानी) भाषा एवं साहित्य में रुचि जागृत किया। इटली में सर्वप्रथम विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। इन विश्वविद्यालयों (जैसे-पादुआ और बोलोनिया विश्वविद्यालय) में कानून के साथ-साथ मानविकी विषयों की पढ़ाई होती थी। फ्रांचेस्को पेट्रार्क (1304-1378) का मानना था कि प्राचीन काल एक विशिष्ट सभ्यता थी जिसे प्राचीन यूनानियों और रोमनों के माध्यम से ही समझा जा सकता था। अत: प्राचीन सभ्यता की लैटिन भाषा की पाण्डुलिपियों की खोज पुन: प्रारम्भ हुई। 1453 में कान्सेटिनोपोल के पतन के साथ ही इटली में बहुत से विद्धान आये और ग्रीक भाषा और साहित्य को बढ़ावा दिया। प्लेटो एवं अरस्तू जैसे दार्शनिकों के ग्रंथों को पढ़ा गया।
A. इटली में पुनर्जागरण ने लैटिन व ग्रीक (यूनानी) भाषा एवं साहित्य में रुचि जागृत किया। इटली में सर्वप्रथम विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। इन विश्वविद्यालयों (जैसे-पादुआ और बोलोनिया विश्वविद्यालय) में कानून के साथ-साथ मानविकी विषयों की पढ़ाई होती थी। फ्रांचेस्को पेट्रार्क (1304-1378) का मानना था कि प्राचीन काल एक विशिष्ट सभ्यता थी जिसे प्राचीन यूनानियों और रोमनों के माध्यम से ही समझा जा सकता था। अत: प्राचीन सभ्यता की लैटिन भाषा की पाण्डुलिपियों की खोज पुन: प्रारम्भ हुई। 1453 में कान्सेटिनोपोल के पतन के साथ ही इटली में बहुत से विद्धान आये और ग्रीक भाषा और साहित्य को बढ़ावा दिया। प्लेटो एवं अरस्तू जैसे दार्शनिकों के ग्रंथों को पढ़ा गया।