Correct Answer:
Option A - 2 मार्च 1930 को गांधी जी ने लार्ड इर्विन को साबरमती आश्रम से ‘उक्त’ पत्र लिखा और यह पत्र सविनय अवज्ञा आंदोलन के ठीक पहले लिखा गया था। इस पत्र का उचित जबाव न मिलने पर गाँधी जी ने कहा था कि ‘घुटने टेककर मैने रोटी मांगी थी और बदले में मुझे पत्थर मिला।’ दांडी मार्च साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930से शुरू होकर 6 अप्रैल 1930को डांडी में एक मुठ्ठी नमक उठाने व नमक कानून का उल्लंघन करने से जुड़ा था। इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत होती है। कुल 24 दिन तक चलने वाली डांडी यात्रा में सर्वाधिक सत्याग्रही गुजरात प्रांत से थे। यहाँ ध्यातव्य है कि डांडी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित है।
A. 2 मार्च 1930 को गांधी जी ने लार्ड इर्विन को साबरमती आश्रम से ‘उक्त’ पत्र लिखा और यह पत्र सविनय अवज्ञा आंदोलन के ठीक पहले लिखा गया था। इस पत्र का उचित जबाव न मिलने पर गाँधी जी ने कहा था कि ‘घुटने टेककर मैने रोटी मांगी थी और बदले में मुझे पत्थर मिला।’ दांडी मार्च साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930से शुरू होकर 6 अप्रैल 1930को डांडी में एक मुठ्ठी नमक उठाने व नमक कानून का उल्लंघन करने से जुड़ा था। इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत होती है। कुल 24 दिन तक चलने वाली डांडी यात्रा में सर्वाधिक सत्याग्रही गुजरात प्रांत से थे। यहाँ ध्यातव्य है कि डांडी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित है।