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Q: "... it has reduced us politically to serfdom. It has sapped the foundation of our culture ... it has degraded us spiritually." This was Mahatma Gandhi complaining of the ill-effect on Indians of which action/policy of the colonial government? ‘‘... यह हमें राजनीतिक रूप से कृषि दासता तक ले आया है। इसने हमारी संस्कृति की नींव को अशक्त कर दिया है .......... इसने हमें आध्यात्मिक रूप से हीन कर दिया है।’’ यह भारतीयों पर पड़ने वाले, उपनिवेशी सरकार के किस कार्य/नीति के बुरे प्रभाव की, महात्मा गाँधी द्वारा शिकायत थी?
  • A. Salt tax/नमक कर
  • B. Inadequate franchise/अपर्याप्त मताधिकार
  • C. Press Act/प्रेस ऐक्ट
  • D. Rowlatt Act/रौलेट ऐक्ट
Correct Answer: Option A - 2 मार्च 1930 को गांधी जी ने लार्ड इर्विन को साबरमती आश्रम से ‘उक्त’ पत्र लिखा और यह पत्र सविनय अवज्ञा आंदोलन के ठीक पहले लिखा गया था। इस पत्र का उचित जबाव न मिलने पर गाँधी जी ने कहा था कि ‘घुटने टेककर मैने रोटी मांगी थी और बदले में मुझे पत्थर मिला।’ दांडी मार्च साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930से शुरू होकर 6 अप्रैल 1930को डांडी में एक मुठ्ठी नमक उठाने व नमक कानून का उल्लंघन करने से जुड़ा था। इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत होती है। कुल 24 दिन तक चलने वाली डांडी यात्रा में सर्वाधिक सत्याग्रही गुजरात प्रांत से थे। यहाँ ध्यातव्य है कि डांडी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित है।
A. 2 मार्च 1930 को गांधी जी ने लार्ड इर्विन को साबरमती आश्रम से ‘उक्त’ पत्र लिखा और यह पत्र सविनय अवज्ञा आंदोलन के ठीक पहले लिखा गया था। इस पत्र का उचित जबाव न मिलने पर गाँधी जी ने कहा था कि ‘घुटने टेककर मैने रोटी मांगी थी और बदले में मुझे पत्थर मिला।’ दांडी मार्च साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930से शुरू होकर 6 अप्रैल 1930को डांडी में एक मुठ्ठी नमक उठाने व नमक कानून का उल्लंघन करने से जुड़ा था। इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत होती है। कुल 24 दिन तक चलने वाली डांडी यात्रा में सर्वाधिक सत्याग्रही गुजरात प्रांत से थे। यहाँ ध्यातव्य है कि डांडी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित है।

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2 मार्च 1930 को गांधी जी ने लार्ड इर्विन को साबरमती आश्रम से ‘उक्त’ पत्र लिखा और यह पत्र सविनय अवज्ञा आंदोलन के ठीक पहले लिखा गया था। इस पत्र का उचित जबाव न मिलने पर गाँधी जी ने कहा था कि ‘घुटने टेककर मैने रोटी मांगी थी और बदले में मुझे पत्थर मिला।’ दांडी मार्च साबरमती आश्रम से 12 मार्च 1930से शुरू होकर 6 अप्रैल 1930को डांडी में एक मुठ्ठी नमक उठाने व नमक कानून का उल्लंघन करने से जुड़ा था। इसी के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत होती है। कुल 24 दिन तक चलने वाली डांडी यात्रा में सर्वाधिक सत्याग्रही गुजरात प्रांत से थे। यहाँ ध्यातव्य है कि डांडी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित है।