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Q: ‘‘इसमें कोई सन्देह नहीं कि कबीर को ‘राम-नाम’ रामानंद जी से ही प्राप्त हुआ। पर आगे चल कर कबीर के ‘राम’ रामानंद के ‘राम’ से भिन्न हो गए।’’ - यह कथन किसका है?
  • A. राहुल सांकृत्यान
  • B. रामचंद्र शुक्ल
  • C. हजारीप्रसाद द्विवेदी
  • D. माताप्रसाद गुप्त
Correct Answer: Option B - ‘रामानन्द’ कबीरदास के गुरू थे। बच्चन सिंह के अनुसार–‘‘हिन्दी भक्ति काव्य का प्रथम क्रांतिकारी पुरस्कर्ता कबीर है।’’ कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने ‘बीजक’ नाम से 1464 ई. में किया जो–रमैनी, सबद और साखी तीन भागों में विभक्त है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इन्हें ‘वाणी का डिक्टेटर’ कहा है। रामचन्द्र शुक्ल ने इनकी भाषा को ‘सधुक्कड़ी’ तथा श्यामसुन्दर दास ने ‘पंचमेल खिचड़ी’ कहा है।
B. ‘रामानन्द’ कबीरदास के गुरू थे। बच्चन सिंह के अनुसार–‘‘हिन्दी भक्ति काव्य का प्रथम क्रांतिकारी पुरस्कर्ता कबीर है।’’ कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने ‘बीजक’ नाम से 1464 ई. में किया जो–रमैनी, सबद और साखी तीन भागों में विभक्त है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इन्हें ‘वाणी का डिक्टेटर’ कहा है। रामचन्द्र शुक्ल ने इनकी भाषा को ‘सधुक्कड़ी’ तथा श्यामसुन्दर दास ने ‘पंचमेल खिचड़ी’ कहा है।

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‘रामानन्द’ कबीरदास के गुरू थे। बच्चन सिंह के अनुसार–‘‘हिन्दी भक्ति काव्य का प्रथम क्रांतिकारी पुरस्कर्ता कबीर है।’’ कबीर की वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने ‘बीजक’ नाम से 1464 ई. में किया जो–रमैनी, सबद और साखी तीन भागों में विभक्त है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इन्हें ‘वाणी का डिक्टेटर’ कहा है। रामचन्द्र शुक्ल ने इनकी भाषा को ‘सधुक्कड़ी’ तथा श्यामसुन्दर दास ने ‘पंचमेल खिचड़ी’ कहा है।