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Q: इस प्रश्न में दो वक्तव्य हैं – एक को कथन (A) तथा दूसरे को कारण (R) कहा गया है, इन दोनों वक्तव्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण कर इस प्रश्न का उत्तर नीचे दिए हुए कूट की सहायता से चुनिए– कूट : कथन (A) : गान्धार शैली पर यूनानी (हेलिनिस्टिक ) प्रभाव के चिन्ह हैं। कारण (R) : उस कला से हीनयान का रूप प्रभावित हुआ।
  • A. (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है
  • B. (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) को सही स्पष्टीकरण नहीं है
  • C. (A) सही है, परन्तु (R) गलत है
  • D. (A) गलत है, परन्तु (R) सही है
Correct Answer: Option C - गांधार शैली को इंडो-यूनानी कला के नाम से भी जाना जाता है। यह शैली प्राचीन भारत में विकसित हुई थी। इस कला पर यूनानी कला का गहरा प्रभाव था। गांधार कला में बुद्ध की मूर्तियों को यूनानी देवताओं के समान बनाया जाता था। इन मूर्तियों में वास्तविकता और सौंदर्य का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। गांधार शैली की मूर्तियाँ आज भी कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
C. गांधार शैली को इंडो-यूनानी कला के नाम से भी जाना जाता है। यह शैली प्राचीन भारत में विकसित हुई थी। इस कला पर यूनानी कला का गहरा प्रभाव था। गांधार कला में बुद्ध की मूर्तियों को यूनानी देवताओं के समान बनाया जाता था। इन मूर्तियों में वास्तविकता और सौंदर्य का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। गांधार शैली की मूर्तियाँ आज भी कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

Explanations:

गांधार शैली को इंडो-यूनानी कला के नाम से भी जाना जाता है। यह शैली प्राचीन भारत में विकसित हुई थी। इस कला पर यूनानी कला का गहरा प्रभाव था। गांधार कला में बुद्ध की मूर्तियों को यूनानी देवताओं के समान बनाया जाता था। इन मूर्तियों में वास्तविकता और सौंदर्य का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। गांधार शैली की मूर्तियाँ आज भी कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।