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Q: इनमें से महाकवि कालिदास के जीवन पर आधारित मोहन राकेश की नाट्यकृति है–
  • A. लहरों के राजहंस
  • B. आषाढ़ का एक दिन
  • C. आधे-अधूरे
  • D. इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - महाकवि कालिदास के जीवन पर आधारित मोहन राकेश की नाट्यकृति ‘आषाढ़ का एक दिन’ है। ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक के पुरुष पात्र - कालिदास, विलोम मातुल, दंतुल। स्त्रीपात्र– अम्बिका, मल्लिका, प्रियगुमंजरी, रंगिणी, संगिणी। आधुनिक काल के सशक्त नाटककारों में मोहन राकेश शीर्ष पर हैं। उनके दो अन्य नाटक– ‘लहरों के राजहंस’ (1963) में ‘नंद’ और ‘सुन्दरी’ की कथा महात्मा बुद्ध के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई हैं। ‘आधे-अधूरे’ (1969) नाटक मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बना को प्रस्तुत करने वाला एक सशक्त नाटक है इसके प्रमुख पुरुष पात्र– महेन्द्रनाथ, सिंघानिया, अशोक, जगमोहन। स्त्री पात्र– सावित्री, बिन्नी, किन्नी, जुनेजा हैं।
B. महाकवि कालिदास के जीवन पर आधारित मोहन राकेश की नाट्यकृति ‘आषाढ़ का एक दिन’ है। ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक के पुरुष पात्र - कालिदास, विलोम मातुल, दंतुल। स्त्रीपात्र– अम्बिका, मल्लिका, प्रियगुमंजरी, रंगिणी, संगिणी। आधुनिक काल के सशक्त नाटककारों में मोहन राकेश शीर्ष पर हैं। उनके दो अन्य नाटक– ‘लहरों के राजहंस’ (1963) में ‘नंद’ और ‘सुन्दरी’ की कथा महात्मा बुद्ध के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई हैं। ‘आधे-अधूरे’ (1969) नाटक मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बना को प्रस्तुत करने वाला एक सशक्त नाटक है इसके प्रमुख पुरुष पात्र– महेन्द्रनाथ, सिंघानिया, अशोक, जगमोहन। स्त्री पात्र– सावित्री, बिन्नी, किन्नी, जुनेजा हैं।

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महाकवि कालिदास के जीवन पर आधारित मोहन राकेश की नाट्यकृति ‘आषाढ़ का एक दिन’ है। ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक के पुरुष पात्र - कालिदास, विलोम मातुल, दंतुल। स्त्रीपात्र– अम्बिका, मल्लिका, प्रियगुमंजरी, रंगिणी, संगिणी। आधुनिक काल के सशक्त नाटककारों में मोहन राकेश शीर्ष पर हैं। उनके दो अन्य नाटक– ‘लहरों के राजहंस’ (1963) में ‘नंद’ और ‘सुन्दरी’ की कथा महात्मा बुद्ध के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत की गई हैं। ‘आधे-अधूरे’ (1969) नाटक मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बना को प्रस्तुत करने वाला एक सशक्त नाटक है इसके प्रमुख पुरुष पात्र– महेन्द्रनाथ, सिंघानिया, अशोक, जगमोहन। स्त्री पात्र– सावित्री, बिन्नी, किन्नी, जुनेजा हैं।