Correct Answer:
Option B - दिए गए कवियों में से ‘तुलसीदास’ संत कवि नहीं है। तुलसीदास रामाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने भक्तिकाल को चार शाखाओं में विभाजित किया है। जिसके ज्ञानाश्रयी शाखा को सन्तकाव्य धारा भी कहा जाता है। चार शाखाएँ एवं उनसे सम्बन्धित कवि इस प्रकार हैं-
(i) ज्ञानाश्रयी शाखा– कबीरदास, रैदास, सुन्दरदास, मलूकदास, दादू दयाल, गुरु नानक, सींगा, हरिदास निरंजनी, बाबा लाल इत्यादि।
(ii) प्रेमाश्रयी शाखा– मलिक मुहम्मद जायसी, कुतुबन, मंझन, नूर मुहम्मद, उसमान, असाइत, मुल्ला दाउद, शेख नबी, कासिम शाह इत्यादि।
(iii) रामाश्रयी शाखा– रंगनाथ मुनि, रामानुजाचार्य, रामानन्द, राघवानन्द, कील्हदास, अग्रदास, नाभादास, विष्णुदास, गोस्वामी तुलसीदास, प्राणचन्द चौहान इत्यादि।
(ग्न्) कृष्णाश्रयी शाखा– निम्बार्काचार्य, श्री भट्ट, बल्लभाचार्य, विट्ठलनाथ, कुंभनदास, सूरदास, परमानन्द दास, कृष्णदास, गोविन्द स्वामी, द्दीत स्वामी, चतुर्भुजदास, नंददास, हरिदास, चैतन्य महाप्रभु, हितहरिवंश, मीराबाई, रसखान आदि।
B. दिए गए कवियों में से ‘तुलसीदास’ संत कवि नहीं है। तुलसीदास रामाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने भक्तिकाल को चार शाखाओं में विभाजित किया है। जिसके ज्ञानाश्रयी शाखा को सन्तकाव्य धारा भी कहा जाता है। चार शाखाएँ एवं उनसे सम्बन्धित कवि इस प्रकार हैं-
(i) ज्ञानाश्रयी शाखा– कबीरदास, रैदास, सुन्दरदास, मलूकदास, दादू दयाल, गुरु नानक, सींगा, हरिदास निरंजनी, बाबा लाल इत्यादि।
(ii) प्रेमाश्रयी शाखा– मलिक मुहम्मद जायसी, कुतुबन, मंझन, नूर मुहम्मद, उसमान, असाइत, मुल्ला दाउद, शेख नबी, कासिम शाह इत्यादि।
(iii) रामाश्रयी शाखा– रंगनाथ मुनि, रामानुजाचार्य, रामानन्द, राघवानन्द, कील्हदास, अग्रदास, नाभादास, विष्णुदास, गोस्वामी तुलसीदास, प्राणचन्द चौहान इत्यादि।
(ग्न्) कृष्णाश्रयी शाखा– निम्बार्काचार्य, श्री भट्ट, बल्लभाचार्य, विट्ठलनाथ, कुंभनदास, सूरदास, परमानन्द दास, कृष्णदास, गोविन्द स्वामी, द्दीत स्वामी, चतुर्भुजदास, नंददास, हरिदास, चैतन्य महाप्रभु, हितहरिवंश, मीराबाई, रसखान आदि।