Correct Answer:
Option D - विपरीत परासण (Reverse Osmosis)- पूर्णत: शुद्ध, साफ, झलकता हुआ, स्वादिष्ट, मृदु, लवणों जीवणु रहित जल प्राप्त करने के लिये विपरीत परासरण (Reverse osmosis) विधि अपनायी जाती हैं। यह प्रक्रिया समुद्री जल की तुलना में खारे पानी (saline water) के लिए अधिक उपयुक्त है। इस प्रक्रिया में, पूर्व उपचार के बाद, खारे पानी को यांत्रिक बलों द्वारा एक पारगम्य झिल्ली में डाला जाता है। इस घटना को अति निस्यंदन (Hyper filtration) भी कहा जाता है। यह प्रणाली होटलों, दफ्तरों, सार्वजनिक संस्थानों आदि के लिये अपनायी जाती है।
∎ विपरीत परासरण का प्रयोग घुलित लवण हटाने के लिये किया जाता है।
∎ R.O. जल शोधन एक महंगी प्रणाली है।
D. विपरीत परासण (Reverse Osmosis)- पूर्णत: शुद्ध, साफ, झलकता हुआ, स्वादिष्ट, मृदु, लवणों जीवणु रहित जल प्राप्त करने के लिये विपरीत परासरण (Reverse osmosis) विधि अपनायी जाती हैं। यह प्रक्रिया समुद्री जल की तुलना में खारे पानी (saline water) के लिए अधिक उपयुक्त है। इस प्रक्रिया में, पूर्व उपचार के बाद, खारे पानी को यांत्रिक बलों द्वारा एक पारगम्य झिल्ली में डाला जाता है। इस घटना को अति निस्यंदन (Hyper filtration) भी कहा जाता है। यह प्रणाली होटलों, दफ्तरों, सार्वजनिक संस्थानों आदि के लिये अपनायी जाती है।
∎ विपरीत परासरण का प्रयोग घुलित लवण हटाने के लिये किया जाता है।
∎ R.O. जल शोधन एक महंगी प्रणाली है।