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Q: In which state is 'Chauri Chaura' , where in February 1922 AD a police station was set on fire? फरवरी 1922 ई. में पुलिस चौकी में आग लगाने की घटना से सम्बन्धित ‘चौरी-चौरा’ किस राज्य में है?
  • A. Rajasthan/राजस्थान
  • B. Madhya Pradesh/मध्य प्रदेश
  • C. Bihar/बिहार
  • D. Uttar Pradesh/उत्तर प्रदेश
Correct Answer: Option D - 4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर जिले (उ.प्र.) के चौरी-चौरा नामक एक छोटे से गाँव का नाम भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। यहाँ के लोगों द्वारा शराब विक्री एवं खाद्यान के मूल्यों में हुई वृद्धि का विरोध किया जा रहा था। जहाँ पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच विद्रोह हो गया, जिसे वहाँ की उग्र भीड़ ने एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया, जिससे 23 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना से दु:खी होकर गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। अनेक राष्ट्रवादी नेताओं ने जैसे सी.आर.दास., मोतीलाल नेहरू, सुभाषचन्द्र बोस, जवाहर लाल नेहरू इत्यादि ने गाँधी जी के इस निर्णय पर असहमति प्रकट की।
D. 4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर जिले (उ.प्र.) के चौरी-चौरा नामक एक छोटे से गाँव का नाम भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। यहाँ के लोगों द्वारा शराब विक्री एवं खाद्यान के मूल्यों में हुई वृद्धि का विरोध किया जा रहा था। जहाँ पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच विद्रोह हो गया, जिसे वहाँ की उग्र भीड़ ने एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया, जिससे 23 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना से दु:खी होकर गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। अनेक राष्ट्रवादी नेताओं ने जैसे सी.आर.दास., मोतीलाल नेहरू, सुभाषचन्द्र बोस, जवाहर लाल नेहरू इत्यादि ने गाँधी जी के इस निर्णय पर असहमति प्रकट की।

Explanations:

4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर जिले (उ.प्र.) के चौरी-चौरा नामक एक छोटे से गाँव का नाम भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। यहाँ के लोगों द्वारा शराब विक्री एवं खाद्यान के मूल्यों में हुई वृद्धि का विरोध किया जा रहा था। जहाँ पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच विद्रोह हो गया, जिसे वहाँ की उग्र भीड़ ने एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया, जिससे 23 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना से दु:खी होकर गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। अनेक राष्ट्रवादी नेताओं ने जैसे सी.आर.दास., मोतीलाल नेहरू, सुभाषचन्द्र बोस, जवाहर लाल नेहरू इत्यादि ने गाँधी जी के इस निर्णय पर असहमति प्रकट की।