Correct Answer:
Option C - राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक सदस्यों में दन्ति-दुर्ग ‘प्रथम’ ने लगभग (735-755 ई.) में चालुक्यों को पराजित कर स्वतंत्र राष्ट्रकूट वंश की स्थापना की और ‘मान्यखेट’ मालखेडा-कर्नाटक को अपनी राजधानी बनाया। दन्तिदुर्ग के बाद उसके चाचा कृष्ण प्रथम ने (756-72 ई.) शासक हुआ जो राष्ट्र कूटवंश का प्रतापी शासक था और इसी ने गुफा संख्या 16 में एलोरा का विश्व प्रसिद्ध ‘कैलाश मंदिर’ का निर्माण करवाया। गुफा संख्या-15 ‘दशावतार मंदिर’ का निर्माण दंतिदुर्ग द्वितीय के काल में हुआ। गुफा संख्या-14 ‘रावण की खाई’ गुफा संख्या 21 रामेश्वरम् मंदिर तथा गुफा संख्या-29 ध्रूमलेण विशेष प्रसिद्ध है।
• एलोरा गुफा में 34 गुफाएँ हैं गुफा संख्या-1 से 12 तक बौद्ध गुफा मध्य की-गुफा संख्या-13-29 तक हिन्दू गुफा तथा पाँच जैन गुफाएँ - 30 से 34 तक हैं।
C. राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक सदस्यों में दन्ति-दुर्ग ‘प्रथम’ ने लगभग (735-755 ई.) में चालुक्यों को पराजित कर स्वतंत्र राष्ट्रकूट वंश की स्थापना की और ‘मान्यखेट’ मालखेडा-कर्नाटक को अपनी राजधानी बनाया। दन्तिदुर्ग के बाद उसके चाचा कृष्ण प्रथम ने (756-72 ई.) शासक हुआ जो राष्ट्र कूटवंश का प्रतापी शासक था और इसी ने गुफा संख्या 16 में एलोरा का विश्व प्रसिद्ध ‘कैलाश मंदिर’ का निर्माण करवाया। गुफा संख्या-15 ‘दशावतार मंदिर’ का निर्माण दंतिदुर्ग द्वितीय के काल में हुआ। गुफा संख्या-14 ‘रावण की खाई’ गुफा संख्या 21 रामेश्वरम् मंदिर तथा गुफा संख्या-29 ध्रूमलेण विशेष प्रसिद्ध है।
• एलोरा गुफा में 34 गुफाएँ हैं गुफा संख्या-1 से 12 तक बौद्ध गुफा मध्य की-गुफा संख्या-13-29 तक हिन्दू गुफा तथा पाँच जैन गुफाएँ - 30 से 34 तक हैं।