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Q: In which of the following construction estimation methods are lengths and breadths of the masonry walls at plinth level taken for calculating quantities? निम्नलिखित में से किस निर्माण आकलन विधि में मात्रा की गणना के लिए कुरसी स्तर पर चिनाई वाली दीवारों की लंबाई और चौड़ाई ली जाती है?
  • A. Crossing Method/सम्पारण विधि
  • B. Bay Method/बे विधि
  • C. Centre Line Method/मध्य रेखा विधि
  • D. Service Unit Method/सेवा इकाई विधि
Correct Answer: Option C - मध्य रेखा विधि (Centre line method)– इस विधि में सभी (लम्बी व छोटी) दीवारों की इनकी मध्य रेखा पर लम्बाई का योग करके और इसे दीवार की नींव में चौड़ाई व मोटाई से गुना करके उस खसका तल पर चिनाई का आयतन ज्ञात कर लिया जाता है। मध्य रेखा विधि में दीवार की लंबाई नींव कंक्रीट, नींव कुरसी तथा अधिरचना में समान रहती है। यह विधि काफी सरल पड़ती है, क्योंकि गणना-कार्य काफी घट जाता है और समय की बचत होती है। मध्य रेखा विधि तभी उपयुक्त है जब भवन की सभी दीवारों का अनुप्रस्थ परिच्छेद समान हो। लम्बी-छोटी दीवार विधि सभी समान अथवा असमान दीवारों के लिये अपनायी जा सकती है।
C. मध्य रेखा विधि (Centre line method)– इस विधि में सभी (लम्बी व छोटी) दीवारों की इनकी मध्य रेखा पर लम्बाई का योग करके और इसे दीवार की नींव में चौड़ाई व मोटाई से गुना करके उस खसका तल पर चिनाई का आयतन ज्ञात कर लिया जाता है। मध्य रेखा विधि में दीवार की लंबाई नींव कंक्रीट, नींव कुरसी तथा अधिरचना में समान रहती है। यह विधि काफी सरल पड़ती है, क्योंकि गणना-कार्य काफी घट जाता है और समय की बचत होती है। मध्य रेखा विधि तभी उपयुक्त है जब भवन की सभी दीवारों का अनुप्रस्थ परिच्छेद समान हो। लम्बी-छोटी दीवार विधि सभी समान अथवा असमान दीवारों के लिये अपनायी जा सकती है।

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मध्य रेखा विधि (Centre line method)– इस विधि में सभी (लम्बी व छोटी) दीवारों की इनकी मध्य रेखा पर लम्बाई का योग करके और इसे दीवार की नींव में चौड़ाई व मोटाई से गुना करके उस खसका तल पर चिनाई का आयतन ज्ञात कर लिया जाता है। मध्य रेखा विधि में दीवार की लंबाई नींव कंक्रीट, नींव कुरसी तथा अधिरचना में समान रहती है। यह विधि काफी सरल पड़ती है, क्योंकि गणना-कार्य काफी घट जाता है और समय की बचत होती है। मध्य रेखा विधि तभी उपयुक्त है जब भवन की सभी दीवारों का अनुप्रस्थ परिच्छेद समान हो। लम्बी-छोटी दीवार विधि सभी समान अथवा असमान दीवारों के लिये अपनायी जा सकती है।