Correct Answer:
Option C - मध्य रेखा विधि (Centre line method)– इस विधि में सभी (लम्बी व छोटी) दीवारों की इनकी मध्य रेखा पर लम्बाई का योग करके और इसे दीवार की नींव में चौड़ाई व मोटाई से गुना करके उस खसका तल पर चिनाई का आयतन ज्ञात कर लिया जाता है। मध्य रेखा विधि में दीवार की लंबाई नींव कंक्रीट, नींव कुरसी तथा अधिरचना में समान रहती है।
यह विधि काफी सरल पड़ती है, क्योंकि गणना-कार्य काफी घट जाता है और समय की बचत होती है।
मध्य रेखा विधि तभी उपयुक्त है जब भवन की सभी दीवारों का अनुप्रस्थ परिच्छेद समान हो।
लम्बी-छोटी दीवार विधि सभी समान अथवा असमान दीवारों के लिये अपनायी जा सकती है।
C. मध्य रेखा विधि (Centre line method)– इस विधि में सभी (लम्बी व छोटी) दीवारों की इनकी मध्य रेखा पर लम्बाई का योग करके और इसे दीवार की नींव में चौड़ाई व मोटाई से गुना करके उस खसका तल पर चिनाई का आयतन ज्ञात कर लिया जाता है। मध्य रेखा विधि में दीवार की लंबाई नींव कंक्रीट, नींव कुरसी तथा अधिरचना में समान रहती है।
यह विधि काफी सरल पड़ती है, क्योंकि गणना-कार्य काफी घट जाता है और समय की बचत होती है।
मध्य रेखा विधि तभी उपयुक्त है जब भवन की सभी दीवारों का अनुप्रस्थ परिच्छेद समान हो।
लम्बी-छोटी दीवार विधि सभी समान अथवा असमान दीवारों के लिये अपनायी जा सकती है।