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Q: In which inscription Chola ruler Vijayalaya's Victory of Tanjore has been mentioned चोल शासक विजयालय द्वारा तंजौर विजय का उल्लेख किस अभिलेख में हुआ है?
  • A. Udhyendiram copper Plate Inscription उदयेन्दिरम् ताम्रपत्र लेख
  • B. Tirunedungalam Inscription तिरुनेडुंगलम् अभिलेख
  • C. Karandai Copper Plate Inscription करण्डै ताम्रपत्र लेख
  • D. Tiruvalangadu Inscription तिरुवालंगाडु अभिलेख
Correct Answer: Option B - चोल इतिहास के सर्वाधिक प्रामाणिक साधन अभिलेख है जो बड़ी संख्या में प्राप्त हुए है। इनमें संस्कृत, तमिल, तेलगू तथा कन्नण भाषाओं का प्रयोग हुआ है। विजयालय (859-871 ई.) के बाद चोल इतिहास मुख्यत: अभिलेखों से ही जाना जाता है। चोल शासक विजयालय द्वारा तंजौर विजय का उल्लेख तिरूनेडुंगलम अभिलेख से प्राप्त होता है। राजेन्द्र प्रथम के समय के प्रमुख लेख तिरूवालंगाडु तथा करन्डै दानपत्र हैं जो उसकी उपलब्धियों का विवरण देते हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण लेख राजराज तृतीय के समय का तिरूवेन्दिपुरम अभिलेख है।
B. चोल इतिहास के सर्वाधिक प्रामाणिक साधन अभिलेख है जो बड़ी संख्या में प्राप्त हुए है। इनमें संस्कृत, तमिल, तेलगू तथा कन्नण भाषाओं का प्रयोग हुआ है। विजयालय (859-871 ई.) के बाद चोल इतिहास मुख्यत: अभिलेखों से ही जाना जाता है। चोल शासक विजयालय द्वारा तंजौर विजय का उल्लेख तिरूनेडुंगलम अभिलेख से प्राप्त होता है। राजेन्द्र प्रथम के समय के प्रमुख लेख तिरूवालंगाडु तथा करन्डै दानपत्र हैं जो उसकी उपलब्धियों का विवरण देते हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण लेख राजराज तृतीय के समय का तिरूवेन्दिपुरम अभिलेख है।

Explanations:

चोल इतिहास के सर्वाधिक प्रामाणिक साधन अभिलेख है जो बड़ी संख्या में प्राप्त हुए है। इनमें संस्कृत, तमिल, तेलगू तथा कन्नण भाषाओं का प्रयोग हुआ है। विजयालय (859-871 ई.) के बाद चोल इतिहास मुख्यत: अभिलेखों से ही जाना जाता है। चोल शासक विजयालय द्वारा तंजौर विजय का उल्लेख तिरूनेडुंगलम अभिलेख से प्राप्त होता है। राजेन्द्र प्रथम के समय के प्रमुख लेख तिरूवालंगाडु तथा करन्डै दानपत्र हैं जो उसकी उपलब्धियों का विवरण देते हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण लेख राजराज तृतीय के समय का तिरूवेन्दिपुरम अभिलेख है।