Correct Answer:
Option B - जल उपचार विधि में, धारक दीवारों या कंक्रीट के स्तम्भों का उपचार छिड़काव या फाँगिग विधि से किया जाता है।
सड़क पेवमेंट, छत स्लैबों के लिए कंक्रीट को बोरी ढककर तराई करने की उत्तम विधि है तथा इसकी तराई कंक्रीट सतह पर पानी भरकर भी की जाती है।
→ कंक्रीट की तराई भाप विधि द्वारा भी की जाती है यह तराई से कंक्रीट की सामर्थ्य ग्रहण दर उच्च होती है। जिससे तराई काल काफी घट जाता है। भाप तराई में 4–5 घंटों में कंक्रीट 28 दिन की सामर्थ्य का 70% तक ग्रहण कर लेती है। भाप का तापमान 75⁰C तक सीमित रखना चाहिए।
→ भाप तराई उच्च ऐलुमिना सीमेन्ट से बनी कंक्रीट के लिए उपयुक्त नहीं है।
B. जल उपचार विधि में, धारक दीवारों या कंक्रीट के स्तम्भों का उपचार छिड़काव या फाँगिग विधि से किया जाता है।
सड़क पेवमेंट, छत स्लैबों के लिए कंक्रीट को बोरी ढककर तराई करने की उत्तम विधि है तथा इसकी तराई कंक्रीट सतह पर पानी भरकर भी की जाती है।
→ कंक्रीट की तराई भाप विधि द्वारा भी की जाती है यह तराई से कंक्रीट की सामर्थ्य ग्रहण दर उच्च होती है। जिससे तराई काल काफी घट जाता है। भाप तराई में 4–5 घंटों में कंक्रीट 28 दिन की सामर्थ्य का 70% तक ग्रहण कर लेती है। भाप का तापमान 75⁰C तक सीमित रखना चाहिए।
→ भाप तराई उच्च ऐलुमिना सीमेन्ट से बनी कंक्रीट के लिए उपयुक्त नहीं है।