Correct Answer:
Option A - रक्त आधान में केवल रक्त का प्रकार ही नहीं बल्कि Rh कारक का भी ध्यान रखना चाहिए। Rh कारक रक्त में उपस्थित एक एंटीजन है। ऐसे व्यक्ति जिसमें यह एंटीजन उपस्थित रहता है तो उसे Rh+ (पॉजीटिव) तथा जिनमें यह अनुपस्थित रहता है उसे Rh– (नेगेटिव) कहते हैं। यदि Rh– (नेगेटिव) के व्यक्ति के रक्त को Rh+ (पॉजीटिव) व्यक्ति के साथ मिलाया जाता है तो Rh– (नेगेटिव) के विरूद्ध प्रतिरक्षी (एण्टीबॉडी) बन जाता है। अत: रक्त आधान में रक्त के प्रकार के साथ ही Rh कारक का ध्यान रखना भी आवश्यक है। अत: विकल्प (a) सही है।
A. रक्त आधान में केवल रक्त का प्रकार ही नहीं बल्कि Rh कारक का भी ध्यान रखना चाहिए। Rh कारक रक्त में उपस्थित एक एंटीजन है। ऐसे व्यक्ति जिसमें यह एंटीजन उपस्थित रहता है तो उसे Rh+ (पॉजीटिव) तथा जिनमें यह अनुपस्थित रहता है उसे Rh– (नेगेटिव) कहते हैं। यदि Rh– (नेगेटिव) के व्यक्ति के रक्त को Rh+ (पॉजीटिव) व्यक्ति के साथ मिलाया जाता है तो Rh– (नेगेटिव) के विरूद्ध प्रतिरक्षी (एण्टीबॉडी) बन जाता है। अत: रक्त आधान में रक्त के प्रकार के साथ ही Rh कारक का ध्यान रखना भी आवश्यक है। अत: विकल्प (a) सही है।