Correct Answer:
Option D - मातहत परिप्रेक्ष्य सामाजिक विज्ञान में एक सैद्धान्तिक दृष्टिकोण है जो उपेक्षित और उत्पीडि़त समूहों के अनुभवों और दृष्टिकोणों पर केन्द्रित है। यह कुलीन समूहों की वर्चस्ववादी शक्ति की प्रतिक्रिया है और असमानता और हाशिये पर रहने वाले प्रमुख आख्यानों को चुनौती देने और उन्हें खत्म करने का प्रयास करता है। अत: कथन II सही है जबकि कथन I मातहत परिप्रेक्ष्य के सभी समर्थकों के लिए आवश्यक रूप से सत्य नहीं है क्योंकि मातहत परिप्रेक्ष्य एक अखंड दृष्टिकोण नहीं है। इस ढांचे के भीतर विद्वानों के विविध दृष्टिकोण, शैक्षिक नीतियों और शक्ति संरचनाओं की आलोचना तथा महिमामंडन हो सकता है।
D. मातहत परिप्रेक्ष्य सामाजिक विज्ञान में एक सैद्धान्तिक दृष्टिकोण है जो उपेक्षित और उत्पीडि़त समूहों के अनुभवों और दृष्टिकोणों पर केन्द्रित है। यह कुलीन समूहों की वर्चस्ववादी शक्ति की प्रतिक्रिया है और असमानता और हाशिये पर रहने वाले प्रमुख आख्यानों को चुनौती देने और उन्हें खत्म करने का प्रयास करता है। अत: कथन II सही है जबकि कथन I मातहत परिप्रेक्ष्य के सभी समर्थकों के लिए आवश्यक रूप से सत्य नहीं है क्योंकि मातहत परिप्रेक्ष्य एक अखंड दृष्टिकोण नहीं है। इस ढांचे के भीतर विद्वानों के विविध दृष्टिकोण, शैक्षिक नीतियों और शक्ति संरचनाओं की आलोचना तथा महिमामंडन हो सकता है।