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Q: In the context of organic evolution, the loss of limbs in snakes is explained by the phenomenon of: जैव विकास के सन्दर्भ में, साँपों में अंगों का लोप होने को स्पष्ट किया जाता है
  • A. Use and disuse of organs/ अंगों का उपयोग तथा अनुपयोग किए जाने से
  • B. Adaptation to living in burrows/ बिलों में रहने के प्रति अनुकूलन से
  • C. Natural selection/प्राकृतिक चयन से
  • D. Inheritance of acquired characters/ उपर्जित लक्षणों की वंशानुगति से
Correct Answer: Option A - 1809 में लैमार्क की पुस्तक `फिलॉसफी जूलोजिक' में उसके सिद्धान्त का प्रकाशन किया गया, जिसे लैमार्कवाद की संज्ञा दी गयी। इस सिद्धान्त के अनुसार जीवों एवं इनके अंगों में सतत बड़े होते रहने की प्राकृतिक प्रवृत्ति पायी जाती है। इन जीवों पर वातावरणीय परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है। अधिक उपयोग में आने वाले अंगों का विकास अधिक जैसे जिराफ की गर्दन तथा कम उपयोग में आने वाले अंगों का विकास कम होता है जैसे साँप की पूँछ।
A. 1809 में लैमार्क की पुस्तक `फिलॉसफी जूलोजिक' में उसके सिद्धान्त का प्रकाशन किया गया, जिसे लैमार्कवाद की संज्ञा दी गयी। इस सिद्धान्त के अनुसार जीवों एवं इनके अंगों में सतत बड़े होते रहने की प्राकृतिक प्रवृत्ति पायी जाती है। इन जीवों पर वातावरणीय परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है। अधिक उपयोग में आने वाले अंगों का विकास अधिक जैसे जिराफ की गर्दन तथा कम उपयोग में आने वाले अंगों का विकास कम होता है जैसे साँप की पूँछ।

Explanations:

1809 में लैमार्क की पुस्तक `फिलॉसफी जूलोजिक' में उसके सिद्धान्त का प्रकाशन किया गया, जिसे लैमार्कवाद की संज्ञा दी गयी। इस सिद्धान्त के अनुसार जीवों एवं इनके अंगों में सतत बड़े होते रहने की प्राकृतिक प्रवृत्ति पायी जाती है। इन जीवों पर वातावरणीय परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ता है। अधिक उपयोग में आने वाले अंगों का विकास अधिक जैसे जिराफ की गर्दन तथा कम उपयोग में आने वाले अंगों का विकास कम होता है जैसे साँप की पूँछ।