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Q: In terms of clean toilet and Urinals, what is the role of the schools authorities? स्वच्छ शौचालय और मूत्रालय के संदर्भ में, स्कूल अधिकारियों की क्या भूमिका है ? I. Proper locking system (bolts and handles) I. उचित लॉकिंग सिस्टम (बोल्ट और हैंडल)। II. The tiolet block should be cleaned twice a day. II. टॉयलेट ब्लॉक को दिन में दो बार साफ करना चाहिए। III. Toilets and Urinals should not be physically handicapped friendly. III. शौचालय और मूत्रालय शारीरिक रूप से विकलांगों के अनुकूल नहीं होने चाहिए। IV. Sanitation facility should not be contaminate ground water needed. IV. स्वच्छता सुविधा को भूजल को संदूषित नहीं करना चाहिए।
  • A. I, II and III/I, II तथा III
  • B. I, III and IV/I, III तथा IV
  • C. I, II and IV/I, II तथा IV
  • D. I, II, III and IV/I, II, III तथा IV
Correct Answer: Option C - व्यक्तिगत स्वच्छता में शौच एक आवश्यक प्रक्रिया है। शिक्षक का यह कत्र्तव्य होता है कि वह बच्चों को स्वच्छता संबन्धी जानकारी दे। शौचालय एवं मूत्रालय को उन्हें सही ढंग से साफ कराना चाहिए। शौचालय में उचित लॉकिंग सिस्टम (बोल्ट और हैंडल) होना चाहिए। बालक एवं बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय होने चाहिए। शौचालयों की उचित रूप से सफाई करानी चाहिए। टॉयलेट ब्लॉक को दिन में दो बार साफ करवाना चाहिए। स्वच्छता सुविधा को भूजल को संदूषित नहीं करना चाहिए। शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के लिए उनके अनुकूल शौचालय एवं मूत्रालय का निर्माण करवाना चाहिए।
C. व्यक्तिगत स्वच्छता में शौच एक आवश्यक प्रक्रिया है। शिक्षक का यह कत्र्तव्य होता है कि वह बच्चों को स्वच्छता संबन्धी जानकारी दे। शौचालय एवं मूत्रालय को उन्हें सही ढंग से साफ कराना चाहिए। शौचालय में उचित लॉकिंग सिस्टम (बोल्ट और हैंडल) होना चाहिए। बालक एवं बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय होने चाहिए। शौचालयों की उचित रूप से सफाई करानी चाहिए। टॉयलेट ब्लॉक को दिन में दो बार साफ करवाना चाहिए। स्वच्छता सुविधा को भूजल को संदूषित नहीं करना चाहिए। शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के लिए उनके अनुकूल शौचालय एवं मूत्रालय का निर्माण करवाना चाहिए।

Explanations:

व्यक्तिगत स्वच्छता में शौच एक आवश्यक प्रक्रिया है। शिक्षक का यह कत्र्तव्य होता है कि वह बच्चों को स्वच्छता संबन्धी जानकारी दे। शौचालय एवं मूत्रालय को उन्हें सही ढंग से साफ कराना चाहिए। शौचालय में उचित लॉकिंग सिस्टम (बोल्ट और हैंडल) होना चाहिए। बालक एवं बालिकाओं के अलग-अलग शौचालय होने चाहिए। शौचालयों की उचित रूप से सफाई करानी चाहिए। टॉयलेट ब्लॉक को दिन में दो बार साफ करवाना चाहिए। स्वच्छता सुविधा को भूजल को संदूषित नहीं करना चाहिए। शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों के लिए उनके अनुकूल शौचालय एवं मूत्रालय का निर्माण करवाना चाहिए।