Correct Answer:
Option C - दादाभाई नौरोजी के समकालीन कारसोनदास मूलजी, महिला मुक्ति के लिए कार्य करने वाले अग्रणी भारतीय समाज सुधारकों में से एक थे। भारतीय इतिहास में एक सुधारक के रूप में कारसोनदास का स्थान 1862 में महाराज परिवाद मामले के कारण है, जिसने उन्हें ‘‘एक सुधारक मार्टिन लूथर ऑफ द बनियन कास्ट’’ की उपाधि प्रदान करायी। इन्होनें एक अखबार (समाचार पत्र) के संपादक के रूप में कार्य किया। 1855 में इन्होनें ‘सत्य प्रकाश’ का संपादन किया जिसमें इन्होनें विधवा विवाह का जोरदार समर्थन किया।
C. दादाभाई नौरोजी के समकालीन कारसोनदास मूलजी, महिला मुक्ति के लिए कार्य करने वाले अग्रणी भारतीय समाज सुधारकों में से एक थे। भारतीय इतिहास में एक सुधारक के रूप में कारसोनदास का स्थान 1862 में महाराज परिवाद मामले के कारण है, जिसने उन्हें ‘‘एक सुधारक मार्टिन लूथर ऑफ द बनियन कास्ट’’ की उपाधि प्रदान करायी। इन्होनें एक अखबार (समाचार पत्र) के संपादक के रूप में कार्य किया। 1855 में इन्होनें ‘सत्य प्रकाश’ का संपादन किया जिसमें इन्होनें विधवा विवाह का जोरदार समर्थन किया।