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Q: In Rigveda, strip of land between two cultivated land was called as ऋग्वेद में दो कृषि योग्य भूमि के बीच में भूमि पट्टी को कहा जाता था –
  • A. Goshtha / गोष्ठ
  • B. Kshetra / क्षेत्र
  • C. Khala / खल
  • D. Khilya / खिल्य
Correct Answer: Option D - आर्यों की संस्कृति मूलत: ग्रामीण थी अत: उनके आर्थिक जीवन के मूलभूत आधार कृषि और पशुपालन थे। कृषि योग्य भूमि को ‘उर्वरा’ अथवा ‘क्षेत्र’ कहा जाता था। ऋग्वेद में दो कृषि योग्य भूमि के बीच की भूमि पट्टी को खिल्य कहा जाता था। ऋग्वेद में लांगल तथा सीर (हल के लिए), फाल, सीता, (हल के फाल से जुती हुई भूमि कूँड़) आदि का उल्लेख मिलता है। आर्य बुआई, कटाई, मड़ाई, आदि क्रियाओं से परिचित थे। खेत को हल-बैल की सहायता से जोतकर उसमें बीज बोया जाता था।
D. आर्यों की संस्कृति मूलत: ग्रामीण थी अत: उनके आर्थिक जीवन के मूलभूत आधार कृषि और पशुपालन थे। कृषि योग्य भूमि को ‘उर्वरा’ अथवा ‘क्षेत्र’ कहा जाता था। ऋग्वेद में दो कृषि योग्य भूमि के बीच की भूमि पट्टी को खिल्य कहा जाता था। ऋग्वेद में लांगल तथा सीर (हल के लिए), फाल, सीता, (हल के फाल से जुती हुई भूमि कूँड़) आदि का उल्लेख मिलता है। आर्य बुआई, कटाई, मड़ाई, आदि क्रियाओं से परिचित थे। खेत को हल-बैल की सहायता से जोतकर उसमें बीज बोया जाता था।

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आर्यों की संस्कृति मूलत: ग्रामीण थी अत: उनके आर्थिक जीवन के मूलभूत आधार कृषि और पशुपालन थे। कृषि योग्य भूमि को ‘उर्वरा’ अथवा ‘क्षेत्र’ कहा जाता था। ऋग्वेद में दो कृषि योग्य भूमि के बीच की भूमि पट्टी को खिल्य कहा जाता था। ऋग्वेद में लांगल तथा सीर (हल के लिए), फाल, सीता, (हल के फाल से जुती हुई भूमि कूँड़) आदि का उल्लेख मिलता है। आर्य बुआई, कटाई, मड़ाई, आदि क्रियाओं से परिचित थे। खेत को हल-बैल की सहायता से जोतकर उसमें बीज बोया जाता था।